विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मुंबई में यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और तकनीक में सहयोग पर चर्चा हुई। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताई।
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार को मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ अहम बैठक की। अल नाहयान सोमवार रात दो दिनों की भारत यात्रा पर मुंबई पहुंचे हैं। बैठक के दौरान डॉ. जयशंकर ने कहा कि एक दशक से अधिक के निरंतर जुड़ाव के बाद, भारत और यूएई के संबंध आज एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में अपने वादे पर पूरी तरह खरे उतर रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस साल दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर असाधारण रूप से गहरा जुड़ाव देखने को मिला है।
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खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर क्या बोले?
यूएई के नेता का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब सऊदी अरब पर हूती विद्रोही लगातार हमले कर रहे हैं। विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र के मौजूदा हालात गहरी चिंता का विषय बने हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत बातचीत और कूटनीति के रास्ते शांति को बढ़ावा देने वाले सभी प्रयासों का लगातार समर्थन करेगा और दोनों देश इस दिशा में मिलकर काम करते रहेंगे।
विदेश मंत्री ने क्या कहा?
डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत व्यापार, ऊर्जा और उर्वरक के स्वतंत्र, सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के प्रवाह का समर्थन करता रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने यूएई में रहने वाले भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अल नाहयान और वहां के शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया। विदेश मंत्री ने दोनों देशों के बीच हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और क्षेत्रीय मुश्किलों के बावजूद दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी नए मानक स्थापित कर रही है। साल 2022 में हुए इस समझौते के बाद से दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है और दोनों तरफ से आपसी निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है।
जयशंकर ने कहा कि रक्षा, ऊर्जा और तकनीक के क्षेत्र में दोनों देशों का आपसी सहयोग अब रणनीतिक रूप ले रहा है। इसके अलावा सांस्कृतिक साझेदारी मजबूत हुई है और लोगों के बीच आपसी संबंध भी बेहतर हो रहे हैं। स्थानीय मुद्रा में लेनदेन की व्यवस्था और द्विपक्षीय निवेश संधि ने दोनों देशों को एक-दूसरे के शीर्ष व्यापारिक और निवेश साझेदार के रूप में और ज्यादा मजबूत किया है।