फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली में रावण के साथ जलेगा कॉकरोच का पुतला: सीजेपी ने बताया तमाशा, दिपके बोले- मुफ्त प्रचार के लिए धन्यवाद

Tue, 20 Oct 2026 02:38 PM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

दिल्ली के पितमपुरा में रामलीला आयोजित करने वाली श्री केशव रामलीला समिति ने रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ 30 फीट ऊंचा कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना बनाई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इसे मुफ्त प्रचार बताते हुए आयोजकों पर तंज कसा।
विज्ञापन
दिल्ली की रामलीला में जलेगा 30 फीट का कॉकरोच का पुतला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली में रामलीला के दौरान रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों के साथ 30 फीट ऊंचा कॉकरोच का पुतला जलाने का मामला सुर्खियों में छाया हुआ है। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आयोजकों को 'मुफ्त में प्रचार' करने के लिए धन्यवाद दिया।
विज्ञापन


दिपके ने मंगलवार को कहा, "मुफ्त में प्रचार करने के लिए धन्यवाद।" वहीं, सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने इस पूरे विवाद को 'तमाशा' बताया।

पुतला जलाने की क्या है वजह?
दिल्ली के पीतमपुरा में हर साल रामलीला आयोजित करने वाली श्री केशव रामलीला समिति ने कहा, ''कॉकरोच का पुतला गंदगी और मैल का प्रतीक होगा। इसके जरिए स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली अभियानों के तहत साफ-सफाई का संदेश देने की योजना है।''

समिति के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अशोक गोयल ने कहा है कि इस फैसले के पीछे कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देने के साथ स्वच्छता के महत्व को उजागर करना है।
विज्ञापन


सीजेपी के प्रदर्शनों के बीच आया फैसला
यह घटनाक्रम राष्ट्रीय राजधानी में सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। संगठन ने शुरुआत में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इसके बाद वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में भी शामिल हुआ।

कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना को लेकर सोशल मीडिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों ने धार्मिक आयोजन में इस तरह के पुतले की उपयुक्तता पर सवाल उठाए हैं। वहीं, कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को त्योहार के पारंपरिक महत्व के साथ मिलाया जा रहा है। वहीं, बहुत से लोगों ने इस फैसले के समर्थन में भी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें