भारतीय बल अपनी निगरानी क्षमताओं को बेहतर करने के लिए तैयार हैं। जल्द ही भारत को इस्राइल से आधुनिक हेरॉन ड्रोन मिलने वाले हैं। इन ड्रोन को लद्दाख और एलएसी के अन्य इलाकों में तैनात किया जाएगा, जिससे चीनी सेना की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और किसी भी आपात स्थिति का तुरंत जवाब दिया जा सके।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार सरकारी सूत्रों ने बताया कि कोरोना वायरस वैश्विक महामारी की वजह से इन ड्रोन की भारत में डिलिवरी होने में देरी के बावजूद भारतीय सैन्य बलों को जल्द ही चार हेरॉन ड्रोन मिलने वाले हैं। ये मौजूदा हेरॉन ड्रोन के मुकाबले ज्यादा आधुनिक हैं और इनकी एंटी-जैमिंग क्षमता कहीं बेहतर है।
ये ड्रोन करीब 45 घंटे तक 35 हजार फुट की ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम हैं। ये स्वचालित टैक्सी टेक-ऑफ व लैंडिंग के साथ उपग्रह संचार (सैटकॉम) से लैस हैं। इनमें लंबी रेंज वाले निगरानी कैमरे व अन्य अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे। भारत अमेरिका से तीन अरब डॉलर में बहुद्देशीय प्रीडेटर ड्रोन भी खरीदने की योजना बना रहा है।
सूत्रों ने बताया कि इन ड्रोन की खरीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से रक्षा बलों को दी गई आपात वित्तीय शक्तियों के तहत की जा रही है। इसके तहत सैन्य बल अपनी क्षमताओं को बेहतर करने के लिए 500 करोड़ रुपये तक के उपकरण खरीद सकते हैं। उल्लेखनीय है कि यह अनुमति चीन के साथ विवाद के बीच दी गई थी।
उल्लेखनीय है कि भारतीय सुरक्षा बल हथियार प्रणालियों को हासिल करने के लिए इस तरह की पहल कर रहे हैं जो चीन के साथ चल रहे संघर्ष में उनकी मदद कर सकते हैं। बता दें कि पिछली बार रक्षा बलों को ऐसी सुविधा 2019 में पाकिस्तान में आतंकवादी शिविरों के खिलाफ बालाकोट हवाई हमले के ठीक बाद दी गई थी।
नौसेना और वायुसेना ने भी खरीदे हथियार-उपकरण
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की ओर से मिली इस आपात शक्ति का उपयोग करते हुए भारतीय नौसेना ने दो प्रीडेटर ड्रोन लीज पर लिए हैं। ये ड्रोन अमेरिकी फर्म जनरल एटॉमिक्स से लिए गए हैं। वहीं, भारतीय वायु सेना ने बड़ी संख्या में एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों के साथ अधिक मारक क्षमता वाले कई अन्य हथियार खरीदे हैं।