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अंडमान में आज तीसरा नेवी बेस खोलेगा भारत, चीन पर रखेगा नजर

Thu, 24 Jan 2019 06:31 AM IST
sapna singla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • यह अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में नौसेना का तीसरा बेस है
  • यहां 1,000 मीटर लंबे रनवे पर हेलीकॉप्टरों और डोर्नियर सर्विलांस एयरक्राफ्टों का संचालन होगा 
  • रनवे को बढ़ाकर 3,000 मीटर किया जाएगा, जिससे लड़ाकू विमानों को भी तैनाती मिल पाएगी
  • मलक्का जलसंधि के बेहद करीब है, जहां से इस क्षेत्र पर आसानी से नजर रखी जा सकती है
  • हर साल करीब 1 लाख 20 हजार जहाज हिंद महासागर से गुजरते हैं, जिनमें से 70 हजार मलक्का जलसंधि से जाते हैं
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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चीन की लगातार मजबूत होती नौसेना और उसके हिंद महासागर में बढ़ते हस्तक्षेप ने भारत की चिंताओं को बढ़ा दिया है। चीनी नौसेना की हरकतों की निगरानी करने के लिए भारत बृहस्पतिवार को हिंद महासागर में अपना तीसरा नेवी बेस खोलने जा रहा है। सामरिक नजरिए से बेहद अहम यह नेवी बेस अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से करीब 300 किलोमीटर दूर उत्तर में स्थित एक रणनीतिक अहमियत रखने वाले द्वीप पर खोला जाएगा। 

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सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इस द्वीप से भारत मलक्का जलसंधि से होकर हिंद महासागर में पहुंचने वाली चीनी पनडुब्बियों और जहाजों पर नजर रखने का काम कर पाएगा। भारतीय नौसना के प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा के मुताबिक, नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा इस नए नेवी बेस आईएनएस कोहासा का उद्घाटन करेंगे।
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बता दें कि भारत के शीर्ष नेतृत्व की चिंता अपने पड़ोस में चीन के श्रीलंका, पाकिस्तान में बनाए गए व्यवसायिक बंदरगाहों को लेकर है, जिन पर चीन किसी भी समय अपनी लगातार बढ़ती जा रही नौसेना को तैनाती दे सकता है। इसके चलते चीन भारत को दोहरे मोर्चे पर घेरने में सफल हो सकता है। वर्ष 2014 में ही भारत इस स्थिति से जूझ चुका है, जब चीन की पनडुब्बी श्रीलंका के कोलंबो बंदरगाह पर खड़ी थी। मोदी सरकार ने तत्काल श्रीलंकाई अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाकर अपनी चिंता जता दी थी।

इसके बाद से ही भारतीय नौसेना ने चीनी चुनौती का जवाब देने के लिए लगातार अंडमान पर अपना ध्यान केंद्रित किया है, जो नजदीक में मौजूद मलेशियाई समुद्री क्षेत्र की मलक्का जलसंधि पर नजर रखने के लिए बेहद उपयोगी है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुर्सी संभालते ही मजबूत नीति के तहत यहां पर नौसेना के जहाजों और एयरक्राफ्टों को तैनात किया गया है।

चीन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। अगर हमें वाकई चीनी मौजूदगी पर नजर रखनी है तो हमें अंडमान द्वीप में पर्याप्त तैयारी करने की जरूरत है। अगर आपके पास एयर बेस हैं तो आप बड़े इलाके को कवर कर सकेंगे। उम्मीद है कि अगले चरण में नौसेना यहां और ज्यादा जहाजों को स्थायी तौर पर तैनात करेगी।
- अनिल जय सिंह, पूर्व नेवी कमोडोर

भारत क्षेत्र में चीन के विस्तारवादी कूटनीति को काउंटर करने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, चीन क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की आक्रामक नीति पर चल रहा है। इसी हफ्ते, भारत के रक्षा अफसरों की मालदीव की रक्षा मंत्री मारिया अहमद दीदी से बातचीत होनी है। मालदीव में पिछले साल चुनाव में चीन-समर्थक सरकार की विदाई के बाद नई दिल्ली रणनीतिक तौर पर अहम इस छोटे से द्वीपीय देश से रिश्तों को फिर मजबूत करने की कोशिश में है।

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