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आईपीएसीसी: हिंद प्रशांत क्षेत्र के सेना प्रमुखों के सम्मेलन की मेजबानी करेगा भारत; इन मुद्दों पर होगा मंथन

Wed, 20 Sep 2023 04:33 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अधिकारियों ने बताया कि 26 और 27 सितंबर को दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन में 22 देशों के पंद्रह सेना प्रमुख और प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी सेना इसकी सह-मेजबान है।
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भारतीय सेना - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय सेना अगले सप्ताह राजधानी दिल्ली में हिंद-प्रशांत देशों के सेना प्रमुखों के दो दिवसीय सम्मेलन इंडो-पैसिफिक आर्मीज चीफ्स कॉन्क्लेव (आईपीएसीसी) की मेजबानी करेगी। इस सम्मेलन में हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते सैन्य दखल पर चिंता जाहिर की जाएगी। साथ ही बढ़ते वैश्विक परिदृश्य में शांति, समृद्धि और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक आम रणनीति बनाने पर भी मंथन होगा। 

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अधिकारियों ने बताया कि 26 और 27 सितंबर को दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन में 22 देशों के पंद्रह सेना प्रमुख और प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी सेना इसकी सह-मेजबान है। इंडो-पैसिफिक आर्मीज चीफ्स कॉन्क्लेव (आईपीएसीसी) में विभिन्न संकटों को कम करने के लिए सैन्य कूटनीति की भूमिका, क्षेत्र के सशस्त्र बलों के बीच सहयोग बढ़ाने के तरीकों और अंतरसंचालनीयता को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

इसके अलावा, इसमें भारत के स्वदेशी रूप से विकसित हथियारों, सैन्य प्रणालियों की एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। 

अधिकारियों ने बताया कि इंडो-पैसिफिक आर्मीज चीफ्स कॉन्क्लेव के 13वें संस्करण के साथ-साथ भारतीय सेना 47वें इंडो पैसिफिक आर्मीज़ मैनेजमेंट सेमिनार (आईपीएएमएस) और सीनियर एनलिस्टेड लीडर्स फोरम (एसईएलएफ) की भी मेजबानी कर रही है। थल सेना के उपप्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचिन्द्र कुमार ने इस कार्यक्रम के बारे में कहा कि यह कार्यक्रम साझा दृष्टिकोण बनाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा। साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्रों के देशों के बीच दुर्जेय और अमिट 'सैनिक बंधन' के माध्यम से दोस्ती को मजबूत करने में मदद करेगा।
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उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से, भारतीय सशस्त्र बलों, विशेषकर भारतीय सेना ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लेफ्टिनेंट जनरल कुमार ने कहा कि भारतीय सेना की प्रतिबद्धता केवल सुरक्षा प्रयासों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय प्रयासों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत प्रयासों तक भी फैली हुई है।

बता दें कि 1999 में द्विवार्षिक सम्मेलन आईपीएसीसी की शुरुआत की गई थी। इसमें आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों के सेना प्रमुख भाग लेते हैं। वही, हर साल आयोजित होने वाला इंडो-पैसिफिक आर्मीज मैनेजमेंट सेमिनार (आईपीएएमएस) जमीनी बलों के लिए सबसे बड़े सम्मेलनों में से एक है। इसका भी सह-मेजबान अमेरिका है। 

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