26/11 मुंबई हमले के बाद साल 2018 में इस तरह के रक्षा अभ्यास की अवधारणा समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में स्थापित विभिन्न उपायों को मान्य करने के लिए की गई थी। 'सी विजिल' की अवधारणा पूरे भारत में तटीय सुरक्षा तंत्र को सक्रिय करने और व्यापक तटीय रक्षा तंत्र का आकलन करने के लिए है।
समुद्री तटों पर देश की रक्षा की तैयारियों की समीक्षा के लिए नौ सेना के दो दिवसीय रक्षा अभ्यास 'सी विजिल-22' का तीसरा संस्करण 15-16 नवंबर को आयोजित किया जाएगा।। नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। ये दो दिवसीय विशाल सैन्य अभ्यास 7,516 किलोमीटर का समुद्र तटीय इलाके में होगा।
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ये हितधारक होंगे शामिल
उन्होंने बताया कि इस पैन इंडिया रक्षा अभ्यास में तटरक्षक बल, महाराष्ट्र पुलिस, भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक की पुलिस के अलावा, सीमा शुल्क, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, मत्स्य पालन विभाग, महानिदेशालय (शिपिंग), बंदरगाह प्राधिकरण, तेल संचालन एजेंसियां, महानिदेशालय के कर्मी और अन्य हितधारक शामिल होंगे। भारतीय नौसेना के कमांड तटीय सुरक्षा अधिकारी कैप्टन सुनील मेनन ने इस अभ्यास के बारे में बताया कि लाइटहाउस और लाइटशिप के साथ ही अन्य संबंधित राज्य और केंद्रीय एजेंसियां अभ्यास का हिस्सा होंगी।
गौरतलब है कि 26/11 मुंबई हमले के बाद साल 2018 में इस तरह के रक्षा अभ्यास की अवधारणा समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में स्थापित विभिन्न उपायों को मान्य करने के लिए की गई थी। 'सी विजिल' की अवधारणा पूरे भारत में तटीय सुरक्षा तंत्र को सक्रिय करने और व्यापक तटीय रक्षा तंत्र का आकलन करने के लिए है। कैप्टन मेनन ने कहा कि अभ्यास का उद्देश्य समुद्र के जरिए आने वाले खतरों के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर तटीय रक्षा संगठन की प्रभावशीलता को मान्य करना है। उन्होंने बताया कि इस अभ्यास के तहत एजेंसियों के बीच समन्वय, सूचनाओं का निर्बाध प्रवाह, प्रासंगिक सुरक्षा अधिकारियों के साथ खुफिया जानकारी साझा करना और सर्वोत्तम प्रथाओं के कार्यान्वयन और आपात स्थिति के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के सत्यापन आदि की समीक्षा की जाएगी।
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दो चरणों में आयोजित होगी ड्रिल
भारतीय नौसेना के कमांड तटीय सुरक्षा अधिकारी कैप्टन सुनील मेनन ने बताया कि ये सैन्य अभ्यास दो चरणो में आयोजित किया जाएगा। कि पहले चरण में एजेंसियां अपने बुनियादी ढांचे का ऑडिट और आकलन करेंगी। वहीं, दूसरे चरण में ट्रॉयल ड्रिल होंगी। इसके जरिए तटीय सुरक्षा एजेंसियों की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा।