लद्दाख में चीन के साथ सीमा विवाद के समाधान तक भारत यूं ही नहीं पहुंचा। इसके लिए उसने चीन की कई मोर्चों पर एक साथ घेराबंदी की। गलवां घाटी की झड़प ऐसे समय हुई थी जब दुनिया कोविड के पंजे में थी। इसी दौरान विभिन्न देशों के साथ भारत की उड़ानें बंद हुईं, लेकिन चीन के साथ भारत ने अब तक सीधी उड़ान सेवा शुरू नहीं की है। चीन लगातार भारत पर दबाव डाल रहा है कि यात्री विमानों का परिचालन फिर शुरू किया जाए। पिछले महीने भारत के नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि दोनों देश जल्द नियमित उड़ानें शुरू करने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
उड़ानों के जरिये सीधे संपर्क पर रोक के अलावा भारत ने चीनी नागरिकों को वीजा जारी करने में सख्ती बरतनी शुरू की। इससे भारत के कुछ महत्वपूर्ण उत्पादन कंपनियों पर असर पड़ा, क्योंकि चीन के विशेषज्ञ इंजीनियरों का वीजा भी खारिज हो गया। हालांकि, भारत ने इसकी बहुत परवाह नहीं की। कंपनियों की ओर से लगातार मिल रहे अनुरोध के बाद अब भारत ने चीन के तकनीशियनों को वीजा देने में तेजी लाने का फैसला लिया है।
इसके अलावा भारत ने 2020 में ही चीनी कंपनियों से भारत में आने वाले निवेश को लेकर जांच की एक अतिरिक्त परत बढ़ा दी थी। इसे चीन की कंपनियों की ओर से भारतीय कंपनियों के अधिग्रहण प्रयासों पर लगाम लगाने के रूप में देखा गया था। इसके कारण अरबों डॉलर का निवेश सरकारी मंजूरी के चरण में ही पिछले चार सालों से अटका हुआ है। इनमें बीवाईडी और ग्रेट वॉल मोटर जैसी बड़ी कंपनियों का अरबों डॉलर का निवेश भी शामिल है।
300 से अधिक चीनी एप्स किए बैन
भारत ने डाटा और निजता का हवाला देकर चीन के 300 से अधिक मोबाइल एप्स को अब तक देश में बैन किया है। इनमें भारत में बेहद लोकप्रिय एप टिकटॉक और चीन के स्वामित्व वाली दक्षिण कोरियाई कंपनी क्राफ्टन इंक का लोकप्रिय मोबाइल गेम एप भी शामिल है।
वीवो-शाओमी पर जांच एजेंसियों का शिकंजा
भारतीय जांच एजेंसियों ने चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वीवो कम्युनिकेशंस पर वीजा नियमों के उल्लंघन और भारत से गैरकानूनी रूप से 1,300 करोड़ डॉलर की राशि गैरकानूनी रूप से बाहर भेजने में की गई कार्रवाई की और चीन पर बेहद दबाव बना। इसी प्रकार चीनी मोबाइल निर्माता शाओमी के 60 करोड़ डॉलर के फंड को जांच एजेंसियों ने कानूनों के उल्लंघन के आरोप में फ्रीज कर दिया।
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