उड़ी आतंकी हमला मामले में पाकिस्तान को सबक सिखाने की पहली कड़ी में भारत ने कूटनीतिक जंग शुरू कर दी है। पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित कर उसे दुनिया से अलग-थलग करने के मिशन के तहत भारत ने विभिन्न देशों में स्थित अपने उच्चायोगों, दूतवासों और संयुक्त राष्ट्र के मिशन के जरिए कूटनीतिक संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
इस मुहिम में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी व्यक्तिगत स्तर पर पहल कर रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने भी पाकिस्तान को बेनकाब करने की रणनीति तैयार की है। इस आतंकी हमले के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते तीन दिनों में लगातार तीसरी बार उच्च स्तरीय बैठक बुलाई।
इस बैठक में पहली बार विदेश सचिव को भी शामिल किया गया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, आईबी और रॉ के मुखिया की उपस्थिति में हुई इस बैठक में एलओसी पर घुसपैठ वाले प्वाइंट को निशाना बनाने और व्यापक पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाने का खाका खींचा गया।
कूटनीतिक जंग के जरिए पाकिस्तान को अलग-थलग करने की मुहिम के तहत विदेश मंत्री 26 सितंबर को यूएन आमसभा में उड़ी आतंकी हमले का मामला उठाते हुए पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करने की मांग करेंगी। इस क्रम में पाकिस्तान के कश्मीर राग का जवाब बलुचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन मामले से दिया जाएगा।