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Israel Iran Conflict: 'संघर्ष रोकने में सक्रिय भूमिका निभाए भारत', पश्चिम एशिया के हालात पर बोले विशेषज्ञ

Mon, 23 Jun 2025 02:35 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञ वैल अव्वाद ने कहा कि भारत सहयोग को बढ़ावा देने और आगे के विस्तार को रोकने के लिए पक्षों के बीच बातचीत में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत को इसका नेतृत्व करना चाहिए कि युद्ध का विस्तार न हो। भारत खाद्य और तेल सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर है।
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विशेषज्ञ वैल अव्वाद। - फोटो : ANI
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विस्तार
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इस्राइल-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष और पश्चिम एशिया के हालात के बीच भारत के महत्व को लेकर चर्चा होने लगी है। पश्चिम एशिया विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार वैल अव्वाद का कहना है कि भारत को पश्चिम एशिया में अपने महत्वपूर्ण दांवों को देखते हुए संघर्ष को रोकने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में भारत का स्वाभाविक विस्तार हुआ है। उन्होंने भारत से शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में नेतृत्व की भूमिका निभाने का आह्वान किया, क्योंकि भारत का यहां खासा प्रभाव है।
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विशेषज्ञ वैल अव्वाद ने कहा कि भारत सहयोग को बढ़ावा देने और आगे के विस्तार को रोकने के लिए पक्षों के बीच बातचीत में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत को इसका नेतृत्व करना चाहिए कि युद्ध का विस्तार न हो। सभी पक्षों से बात करना अच्छा संकेत है। भारत नेतृत्व कर सकता है और बाकी देशों के साथ ऐसा कर सकता है। जो संकट के शांतिपूर्ण समाधान की मांग कर रहे हैं। अव्वाद ने कहा कि भारत खाद्य और तेल सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर है। मध्य पूर्व में नौ मिलियन से अधिक भारतीय रहते और काम करते हैं। भारत के पास प्रेषण और व्यापार सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रीय आर्थिक हित हैं।

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युद्ध छिड़ा तो भारत सबसे पहले पीड़ित होगा
अव्वाद ने कहा कि अगर युद्ध छिड़ता है, तो भारत सबसे पहले पीड़ित होगा क्योंकि भारत इस क्षेत्र में नंबर एक हितधारक है। पश्चिम एशिया में 90 लाख भारतीय रहते हैं। जिनका सालाना राजस्व 60 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। दुनिया के उस हिस्से से तेल आयात में उनकी हिस्सेदारी है।

उन्होंने कहा कि भारत के 1.34 करोड़ एनआरआई में से 66% से अधिक पश्चिम एशिया में रहते हैं। मुख्य रूप से यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान और बहरीन में। युद्ध से फारस की खाड़ी में बड़े पैमाने पर भारतीय प्रवासी, क्षेत्रीय तनावों से जोखिम का सामना कर सकते हैं। जिससे उनकी सुरक्षा भारत की प्रमुख प्राथमिकता बन जाती है। अव्वाद ने कहा कि भारत ने संघर्ष के प्रति अपने दृष्टिकोण में एक रणनीतिक अस्पष्टता अपनाई है, जो अमेरिका, इस्राइल और अरब देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करती है।

भारत का खाड़ी देशों के साथ 160 डॉलर से ज्यादा का व्यापार: जयशंकर
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने  कहा था कि भारत का खाड़ी देशों के साथ व्यापार करीब 160 से 180 डॉलर के बीच है। उन्होंने कहा, हमारी खाड़ी में बहुत व्यापक और अहम मौजूदगी है। यहां 90 लाख से अधिक भारतीय काम करते हैं और रहते हैं। इसके अलावा, खाड़ी देशों से भारत का संपर्क पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका और भूमध्य सागर तक फैला हुआ है। 
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विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि भारत का भूमध्य सागरीय देशों के साथ सालाना व्यापार करीब 80 अरब डॉलर है और यहां करीब पांच लाख प्रवासी भारतीय रहते हैं। उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनमें हवाई अड्डे, बंदरगाह, रेल, हरित हाइड्रोजन, इस्पात आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा,भारत और पश्चिम एशिया के प्रयासों को अफ्रीका और यूरोप तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि संपर्क और समुद्री सुरक्षा को लेकर बहुपक्षीय सहयोग की जरूरत है। 

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