नेपाल में विरोध प्रदर्शन के बाद बिगड़े हालात को लेकर सामना ने मोदी सरकार को सख्त हिदायत दी है। सामना में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है कि नेपाल में आग बेरोजगारी और गुस्से की चिंगारी से भड़की है। भारत को इससे सबक सीखना चाहिए। बेरोजगारी, लोकतंत्र का विनाश और बढ़ती जाति-धर्म की राजनीति देश के लिए बेहद खतरनाक हैं।
सामना में लिखा गया कि भारत में रोजगार का नाश हो गया है। 80 करोड़ लोगों को सरकार द्वारा मुफ्त दिए जाने वाले पांच से दस किलो राशन पर गुजारा करना पड़ रहा है। मोदी-शाह लोकतंत्र का नाश करके चुनाव जीत रहे हैं। लोकतंत्र के सभी स्तंभ ढहते दिख रहे हैं। धर्म और जाति की राजनीति अपने चरम पर पहुंच गई है। ये सभी अव्यवस्थाएं देश के लिए खतरनाक हैं।
संपादकीय में अन्य देशों के हालात की ओर इशारा करते हुए कहा गया है कि कैसे भूख, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। इससे संसद लोगों के लिए बेकार हो गई। सीमा पर स्थित लगभग हर देश में विद्रोह भड़क उठे। श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में भी यही स्थिति है। जनता ने श्रीलंका और बांग्लादेश की सरकारों को उखाड़ फेंका क्योंकि भ्रष्टाचार असहनीय हो गया था। जब लोगों के मन में स्वाभिमान की चिंगारी भड़कती है, तो उसे भड़कने में देर नहीं लगती। फिर लोग बंदूकों और तोपों की भी परवाह नहीं करते।
संपादकीय में कहा गया कि आज नेपाल के प्रधानमंत्री पहले चीन और फिर पाकिस्तान जाते हैं। यह भारत की विदेश नीति की विफलता है। सैकड़ों चीनी शिक्षक वर्तमान में नेपाल में हैं और नेपाल के लोग उनसे चीनी भाषा सीख रहे हैं। पहले नेपाल का रंग भगवा था। अब यह पूरी तरह से चटक लाल हो गया है और भारत सरकार इस बदलाव को रोक नहीं पाई। चीन के साथ घनिष्ठ संबंधों ने नेपाल को यह दावा करने का साहस दिया है कि भारत देश की जमीन पर अवैध कब्जा कर रहा है।
बता दें कि नेपाल ने लिपुलेख दर्रे, कालापानी और लिंपियाधुरा पर अपना दावा जताया है और इससे पहले लिपुलेख के जरिए भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार फिर से शुरू करने पर भी आपत्ति जताई थी। केंद्र सरकार ने इसके जवाब में व्यापार मार्ग पर काठमांडू के क्षेत्रीय दावे को अस्थिर बताया है और इसे ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित नहीं बताया है।
सोशल मीडिया पर पाबंदी के बाद बढ़ा बवाल
फेसबुक और यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया मंचों पर पाबंदी के बाद सोमवार को शुरू हुआ जेन-जी आंदोलन सोमवार देर रात सरकार की ओर से पाबंदी हटाने के बावजूद मंगलवार को और उग्र हो गया। राजधानी काठमांडो में कर्फ्यू और भारी सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए प्रदर्शनकारियों ने सिंह दरबार, संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, विशेष अदालत, राष्ट्रपति आवास, शीर्ष नेताओं के घर और विभिन्न दलों के दफ्तरों में आगजनी और तोड़फोड़ की।
सिंह दरबार पूरी तरह से राख हो गया है। इसमें पीएम व मंत्रियों के दफ्तर हैं। पीएम ओली के बालकोट और जनकपुर स्थित निजी घरों, पूर्व पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड, संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग, पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक, ऊर्जा मंत्री दीपक खड़का का बुढानीलकंठ घर और कांग्रेस महासचिव गगन थापा के रातोपुल निवास तक को निशाना बनाया। अब तक सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में कम से कम 20 लोग मारे गए और 500 घायल हुए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए काठमांडो सहित कई शहरों में कर्फ्यू लगा दिया गया।