कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रविवार को मालदीव की चीन से निकटता को लेकर कहा कि भारत को सतर्क रहने की जरूरत है। इसके साथ ही सरकार को इससे होने वाले खतरे के बारे में पता होना चाहिए। वह चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान बोले कि चीन भारत की सीमा पर अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा के बाद मालदीव-भारत राजनयिक विवाद पर अपने विचारों पर टिप्पणी करते हुए थरूर ने कहा, 'हमें मालदीव सरकार की चीन के साथ बढ़ती निकटता पर बहुत ध्यान से नजर रखनी होगी।'
तेजी से बढ़ रहा चीन का प्रभाव
विदेश राज्य मंत्री रह चुके थरूर ने आगे बताया 'इस तथ्य में कोई संदेह नहीं है कि चीन हमारी परिधि में अपना प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। हमारे सभी पड़ोसी देशों में, बिना किसी अपवाद के, हर किसी पर उनका प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।' उन्होंने आगे कहा, 'हमें निश्चित रूप से सतर्क रहना चाहिए और मुझे यकीन है कि हमारी सरकार को उन खतरों के बारे में पता होना चाहिए जो इसका प्रतिनिधित्व करती हैं और कुछ सीमाएं होंगी, जिन्हें सरकारों के बीच निजी तौर पर सूचित किया जाएगा।'
हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति पर सोशल मीडिया पर चर्चा नहीं की जानी चाहिए और भारत और मालदीव के बीच राजनयिक विवाद के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर व्यापक रूप से चर्चा के बाद अधिक गंभीर स्तर पर जुड़ाव होना चाहिए।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का क्या रहा बजट
इस बीच, इस मौके पर मौजूद तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई ने डीएमके सरकार द्वारा हाल ही में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट का जिक्र करते हुए कहा, 'राज्य ने निवेशक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जिसमें हमें 6.64 लाख करोड़ रुपये मिले जो कि अन्य राज्यों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों से निवेश प्रतिबद्धताओं के रूप में प्राप्त राशि की तुलना में कम है।'
अन्नामलाई ने अन्य राज्यों का जिक्र किया, जिसमें बताया कि गुजरात को 26 लाख करोड़ रुपये और उत्तर प्रदेश को 33 लाख करोड़ रुपये मिले हैं। 2022 में, कर्नाटक ने इसी तरह का निवेशक शिखर सम्मेलन आयोजित किया और उसे 10 लाख करोड़ रुपये मिले। लेकिन अकेले उत्तर प्रदेश के पूर्वाचल और बुन्देलखण्ड को तमिलनाडु से 9.74 लाख करोड़ रुपये अधिक मिले हैं।
बीजेपी अध्यक्ष ने आगे बोले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके मंत्रियों को समझना चाहिए कि पैसा हमेशा भविष्य देखेगा, पैसा अतीत नहीं देखेगा। अगले 20 साल क्या होंगे, अर्थव्यवस्था कैसे स्थिर रहेगी, ये ऐसे क्षेत्र हैं जिन पर उन्हें ध्यान देने की जरूरत है।