पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि भारत ने युद्धग्रस्त यूक्रेन से अपने छात्रों को निकालकर दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे के संघर्ष विराम के लिए रूस और यूक्रेन दोनों के साथ बातचीत की थी।
पांचवें राजाराम जयपुरिया स्मृति व्याख्यान में पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्वगुरु या वैश्विक नेता बनने की राह पर है। उन्होंने युवाओं से इसमें योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम सहित कई उदाहरण दिए और बताया कि कैसे भारत ने खुद को वैश्विक नेता साबित किया।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बारे में बात करते हुए कोविंद ने कहा कि सभी को उम्मीद थी कि यह संघर्ष एक या दो महीने में खत्म हो जाएगा। यही वजह है कि कई भारतीय छात्र युद्धग्रस्त यूक्रेन में फंस गए। जब छह-आठ महीने बीत गए, तो स्थिति ऐसी हो गई कि जिंदा रहना मुश्किल हो गया। छात्रों के अभिभावकों की चिंताओं को सरकार ने माना। मैं जानबूझकर यह उदाहरण दे रहा हूं, क्योंकि मैं उस समय राष्ट्रपति भवन में था।
उन्होंने कहा, मैंने पूछा कि इतने सारे भारतीय यूक्रेन क्यों जाते हैं। मुझे बताया गया कि वहां चिकित्सा शिक्षा सस्ती है। हमारे छात्र फंस गए। अगर उन्हें कुछ हो जाता तो सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाता। हालांकि, यह सरकार की जिम्मेदारी नहीं थी। माता-पिता ने उन्हें वहां भेजा, लेकिन सरकार को दोषी ठहराया जाता।
कोविंद ने कहा, हमारी सरकार ने एक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वैश्विक नेता की भूमिका निभाई और रूस व यूक्रेन दोनों देशों से चौबीस घंटे के लिए संघर्ष विराम के लिए बात की। उन्होंने कहा, दोनों बड़े देश हैं। यदि कोई अन्य देश दखल देता तो क्या वे सहमत होते? नहीं।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, हमारे प्रधानमंत्री ने रूस और यूक्रेन दोनों से बात की और भगवान का शुक्र है कि दोनों सहमत हो गए। चौबीस घंटे के लिए युद्ध रुका था। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका, पाकिस्तान और चीन जैसे अन्य देशों के छात्र भी फंस गए थे। लेकिन उनकी सरकारें उन्हें निकाल न सकीं।
उनके नेताओं को भी भारत के उदाहरण का अनुसरण करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि आपने छात्रों को भेजने से पहले हमसे नहीं पूछा। उन्होंने कहा, यह वैश्विक नेतृत्व है और आज की तारीख में भारत की पहचान वैश्विक नेता के तौर पर बन रही है। कोविंद ने यह भी कहा कि विश्वगुरु के विचार का मतलब यह नहीं है कि भारत के नेतृत्व में एक वैश्विक सरकार होगी।