भारत ने फिजी और सोमालिया को सहायता खेप भेजी है। भारत ने फिजी को कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए पांच मीट्रिक टन काली आंखों वाले लोबिया के बीज भेजे हैं। जबकि, सोमालिया को मानवीय सहायता खेप भेजी है। इस खेप में आवश्यक दवाओं, सर्जिकल वस्तुओं, अस्पताल की आवश्यक वस्तुओं और जैव चिकित्सा उपकरणों सहित कई महत्वपूर्ण चिकित्सा आपूर्तियां शामिल हैं।
भारत ने शनिवार को फिजी की मदद के लिए पांच मीट्रिक टन काली आंखों वाले लोबिया के बीज भेजे। यह बीज खेती में सुधार लाने के लिए भेजे गए हैं। यह पहली बार है जब भारत ने ऐसे बीज फिजी को भेजे हैं। इसके अलावा, भारत ने सोमालिया के लोगों के लिए 10 टन मानवीय सहायता की एक खेप भेजी है। यह अफ्रीकी राष्ट्र के प्रति अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का एक महत्वपूर्ण संकेत है।
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विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट में बताया कि यह मदद भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत दी गई है, जिससे पूर्वी देशों के साथ संबंध मजबूत किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत अपने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दोस्तों के साथ एकजुटता दिखा रहा है। इसी के तहत फिजी को खेती के लिए पांच मीट्रिक टन काली आंखों वाले लोबिया के बीज भेजे गए हैं। बीजों की पहली खेप आज दिल्ली से फिजी के लिए रवाना हुई।
भारत-फिजी के संबंध आपसी सम्मान पर आधारित
सुवा स्थित भारतीय उच्चायोग के अनुसार, भारत और फिजी के बीच संबंध आपसी सम्मान, सहयोग और मजबूत सांस्कृतिक व लोगों के बीच संबंधों पर आधारित हैं। नवंबर 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिजी यात्रा और भारत-प्रशांत द्वीप समूह सहयोग मंच (FIPIC) के शुभारंभ के बाद इन संबंधों को और बल मिला, जो प्रशांत महासागर के देशों तक भारत की पहुंच में एक महत्वपूर्ण क्षण था।
सोमालिया को 10 टन मानवीय सहायता भेजी
भारत ने सोमालिया के लोगों के लिए 10 टन मानवीय सहायता की एक खेप भेजी है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा शनिवार को एक्स पर की गई एक पोस्ट के अनुसार, इस खेप में आवश्यक दवाओं, सर्जिकल वस्तुओं, अस्पताल की आवश्यक वस्तुओं और जैव चिकित्सा उपकरणों सहित कई महत्वपूर्ण चिकित्सा आपूर्तियां शामिल हैं। एमईए ने कहा कि खेप सोमालिया के लिए रवाना हो गई है। इन पैकेजों पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज भी प्रमुखता से अंकित था और 'भारत की जनता और सरकार की ओर से उपहार' लिखा था।
दशकों से संकट का सामना कर रहा सोमालिया
यूरोपीय आयोग के अनुसार, सोमालिया दशकों से लंबे समय तक संघर्ष और चरम मौसम की स्थिति का सामना कर रहा है। लगातार पांच असफल वर्षा ऋतुओं के कारण 2020-2023 के सूखे ने देश के 90 प्रतिशत हिस्से को प्रभावित किया और 80 लाख से ज्यादा लोगों को प्रभावित किया।