दुनिया के चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा भारत
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भारत अगले साल तक स्वदेशी सुपर कंप्यूटर बना लेगा और दुनिया के उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिन्होंने कंप्यूटर के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। इस समय दुनिया में शीर्ष सुपरकंप्यूटिंग मशीनें अमेरिका, जापान, चीन और यूरोपीय संघ के देशों के पास है। इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 4500 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। इसके पहले चरण में 10-12 मशीनें तैयार की जाएंगी। पहला सुपर कंप्यूटर एक अगस्त 2017 तक आ जाएगा। मशीन तैयार होने के बाद इस सुपर कंप्यूटर की स्पीड 15 पीटा फ्लोप होगी। यह देश का सबसे तेज गणना करने वाला सुपर कंप्यूटर होगा।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव आशुतोष शर्मा ने बताया कि भारत के पहले सुपर कंप्यूटर ‘परम’ को बनाने का काम सेंटर फॉर एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) संभाल रही है। सुपर कंप्यूटर को देश भर के विभिन्न संस्थानों में रखा जाएगा। सुपर कंप्यूटर जलवायु, मौसम पूर्वानुमान, दवाओं की खोजों जैसे विभिन्न उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। देश के परम, परम 10 और परम युवा 12 सुपर कंप्यूटर सबसे तेज कंप्यूटर हैं लेकिन अब भारत इनसे भी 1000 गुना तेज कंप्यूटर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
देश के इस बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के साथ सी-डैक पुणे, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस काउंसिल (बंगलूरू), आईआईटी कानपुर, काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेथडोलॉजी और डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक जुड़े हैं। सरकार ने पिछले साल मार्च में ही राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन की योजना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत 80 सुपर कंप्यूटर अगले सात वर्षों में बनाए जाएंगे। कुछ आयात किए जाएंगे और बाकी देश में ही बनाये जाएंगे।