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देश की लापता 24 ऐतिहासिक धरोहरों की तलाश शुरू

Mon, 15 Jan 2018 01:33 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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पुरातत्व
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भारतीय पुरातत्व विभाग (एएसआई) ने देश की लापता 24 धरोहरों की तलाश शुरू कर दी है। बार-बार संसद में लापता धरोहरों का मामला उठने के बाद एएसआई ने अपने स्थानीय अधिकारियों का निर्देश दिया है कि इन धरोहरों की तलाश शुरू की जाए। इन अनमोल स्मारकों में कई मंदिर, बौद्ध खंडहर, कब्रिस्तान, मीनारें आदि शामिल हैं। इसमें से कई धरोहर दशकों से गायब हैं। उत्तर प्रदेश की सबसे ज्यादा दस इमारतें लापता हैं। 
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इमारतों के लापता होने के कई कारण है। कई धरोहर का रिकार्ड एएसआई नहीं रख पाया। इससे उनकी भौगोलिक स्थिति को तलाशना मुश्किल हो गया है। कई धरोहर प्राकृतिक आपदाओं और निर्माण कार्यों की भेंट चढ़ने की आशंका है। एएसआई निदेशक देवकीनंदन डिमरी के मुताबिक 24 धरोहरों की यह सूची ब्रिटिश काल की हैं। तब से कई जगहों और गांवों के नाम बदल गए हैं। खसरा नंबर परिवर्तित हो चुके हें। ऐसे में उनकी तलाश मुश्किल हो गई है। आशंका है कि कई धरोहरों को दूसरी जगहों पर पहुंचा दिया गया होगा। 

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सात धरोहरों को खोज चुका है एएसआई

खुदाई में मिले पुरातात्विक अवशेष।
एएसआई के मुताबिक देश की कुल संरक्षित इमारतों की संख्या 3864 है। 14 धरोहर शहरीकरण और 12 बांधों की भेंट चढ़ गई हैं। सिर्फ 24 इमारतें लापता हैं। 2009 में इनकी संख्या 35 थीं। यानी नौ साल मेें 11 इमारतों को खोज निकाला गया है। जैसे अल्मोड़ा का कुटुम्बरी देवी मंदिर पहले लापता था, लेकिन बाद में पता चला कि मंदिर गिरने के बाद गांव वालों ने उसके अवशेष ले आए और उसे फिर से मंदिर का रूप दे दिया। जम्मू एवं कश्मीर, कर्नाटक की दो स्मारक और पुणे में स्थित यूरोपियन कब्रों को भी खोज जा चुका है।

मुश्किल हो गई है धरोहरों की रक्षा

इतिहासकार स्वप्ना लिडल के मुताबिक बहुत से धरोहर पर्यटन स्थल नहीं होते हैं। स्थानीय लोगों को भी नहीं पता होता है कि उनका ऐतिहासिक महत्व है। ऐसे में किसी निर्माण के रास्ते में वे पड़ जाएं, तो उनकी रक्षा करना मुश्किल हो जाता है। इस साल दो जनवरी को संसद में एक कानून पेश किया गया, जिसमें ऐतिहासिक धरोहरों के आसपास के क्षेत्र में निर्माण प्रतिबंध के नियम कमजोर हो गए हैं। कई सांसदों ने इसका विरोध किया है। यह बिल अभी राज्यसभा में पास होना बाकी है। 
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