नेवी ने अपने एक ट्रांसजेंडर सिपाही को नौकरी से हटाने के लिए रक्षा मंत्रालय से सिफारिश की है। नौसेना का कहना है कि किसी महिला को सिपाही के तौर पर रखना नेवी की नीतियों के खिलाफ है। ट्रांसजेंडर शाबी ने इंटर्व्यू में बताया कि वह पैदाइशी पुरुष था और एम के गिरी के नाम से जाना जाता था। उसने बताया कि जब नेवी को उसके सेक्स जेंडर के बारे में पता चला तो किसी तरह का कोई विरोध नहीं किया था।
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बता दें कि शाबी ने सात साल पहले पूर्वी नवल कमांड का मरीन इंजीनियरिंग विभाग बतौर सिपाही ज्वाइन किया था। 2016 में शबी ने विजाग में एक डॉक्टर से बात की और अपना इलाज करवाया। लेकिन शाबी को महसूस हुआ कि उसके पास कोई विकल्प नहीं है इसलिए उन्होंने बाइस दिन की लीव ली और दिल्ली में सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी के लिए चली गईं।
सर्जरी के बाद शाबी विशाखापतनम के नौसेना बेस में वापस आईं जहां उन्हें अपना सेक्स बताने के लिए फोर्स किया गया। बता दें कि इस ऑपरेशन के बाद शाबी यूरिनरी इंफेक्शन से पीड़ित हो गईं।
उन्होंने बताया कि सेक्स बदलवाने के बाद भी उन्हें पुरुष वार्ड में रखा गया जहां तीन जवान 24x7 गार्ड के तौर पर तैनात थे। उन्होंने आगे बताया कि उन्हें छह महीने तक मनोरोग वार्ड में भी रखा गया और मानसिक तौर पर उनको सताया गया।
शाबी ने आगे कहा कि डॉक्टरों ने उसे मानसिक तौर पर असहाय करने की पूरी कोशिश की लेकिन उन्हें इसमें कामयाबी नहीं मिली।
वहीं 12 अगस्त को नेवी के मनोरोग वार्ड से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने अपनी नौकरी एक महिला महिला सिपाही के तौर पर फिर से शुरू की। जानकारी के मुताबिक, भारतीय नेवी ने रक्षा मंत्रालय को शाबी का केस भेजा है और उसकी आगे की नौकरी करने के लिए जवाब मांगा है।
बता दें कि शाबी को उनके डिविजनल अधिकारी ने मीडिया को आपबीती बताने पर नौकरी से निकाले जाने की धमकी दी है। नेवी की पॉलिसी के अनुसार, ट्रांसजेंडर्स के लिए नौकरी की मनाही है। लेकिन शाबी इन पॉलिसी के खिलाफ है और उन्होंने इन नीतियों से लड़ने की कसम ली है।
शाबी ने कहा कि 'मैं इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाउंगी और मुझे मेरे अधिकारों के लिए लड़ने का अधिकार है, मुझे बेहद दुख है कि नेवी ने मुझे नौकरी से निकाल दिया है लेकिन जितना हो सकेगा कानूनी लड़ाई लड़ूंगी।
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मनीष से शाबी बनी महिला सिपाही ने पीएम मोदी से भी मदद मांगने की बात कही है। बता दें कि भारत में अभी ट्रांसजेंडरों को तीनों सेनाओं में नौकरी के लिए कोई प्रावधान नहीं है।
लेकिन कनाडा, इजराइल, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, यूके, न्यूजीलैंड, स्वीडन और जर्मनी ने अपनी तीनों सेनाओं में ट्रांसजेंडरों को नौकरी की अनुमति दे रखी है। लेकिन अभी हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना में ट्रांसजेंडरों की नौकरी देने पर मनाही कर दी है।