भारत ने यूरोपीय यूनियन के साथ वह करार कर लिया है जिस पर पूरी दुनिया की आंख लगी हुई थी। 'मदर ऑफ डील्स' कहे जा रहे इस समझौते से भारत को बड़े लाभ होने की संभावना है। भारत की निर्यात श्रेणी की लगभग सभी वस्तुओं को यूरोप के 27 देशों में शून्य या बेहद कम टैक्स दरों पर प्रवेश मिल जाएगा। इससे देश के कृषि उत्पादकों, सेवा प्रदाता कंपनियों, दवा-कपड़ा निर्माण क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों को लाभ होगा। इससे बड़ी संख्या में रोजगार निर्माण होने की भी संभावना है। हालांकि, इस डील से अमेरिका और चीन के आर्थिक समीकरणों को नई चुनौती मिल सकती है क्योंकि अमेरिका ने भारीर टैरिफ लगाकर और चीन ने संवेदनशील वस्तुओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर भारत पर जिस तरह दबाव बनाने का काम किया था, इस डील से उनके 'अर्थहीन' रह जाने की संभावना है।
ठहरी आबादी वाले यूरोपीय देशों को मिलेगा बड़ा बाजार
यूरोपीय यूनियन को भी इस डील से बड़ा लाभ होने की संभावना है। यूरोपीय देश इस समय बड़ी महंगाई और अर्थव्यवस्था की सुस्ती के दौर से गुजर रहे हैं। जनसंख्या वृद्धि दर में भारी कमी के कारण वहां वस्तुओं की खपत में भी ठहराव का दौर चल रहा है। ऐसे में यूरोपीय देशों की कंपनियों को 140 करोड़ लोगों की आबादी वाला भारत जैसा देश मिल गया है जो उनकी वस्तुओं की खपत का बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे पूरे यूरोप की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
इटली-फ्रांस जैसे देश महंगी शराबें बनाने के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। अब तक भारत में इन शराबों की बिक्री पर सौ फीसदी या उससे भी ज्यादा टैक्स लगता था। लेकिन इस समझौते के बाद यह दरें दस फीसदी की करीब हो सकती हैं। इससे भारत में विदेशी शराबों की बिक्री और यूरोप का मुनाफा बढ़ सकता है। इससे भारत में शराब के शौकीनों को उच्च कोटि की विदेशी शराब सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकेगी।
भारत में महंगी विदेशी गाड़ियों को खरीदने वालों का एक बड़ा उपभोक्ता वर्ग मौजूद है। अब तक यूरोप निर्मित कारों को खरीदने पर भारी टैक्स देना पड़ता था। कई बार यह टैक्स गाड़ियों के मूल्य के बराबर होता था। रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रिया पूरी करने के बाद वाहन की खरीद दोगुनी कीमत तक पहुंच जाती थी। लेकिन अब भारत-यूरोपीय यूनियन में डील होने के बाद इन दरों में भारी कटौती होने का अनुमान है। इससे यूरोपीय देशों को भारत में महंगी कारें बेचने का अवसर मिलेगा और भारत के नव उच्च वर्ग को सस्ती दरों पर महंगी गाड़ियां मिल सकेंगी।
भारत में मिलेंगे सस्ते श्रमिक, बढ़ेगा रोजगार
अमेरिका ने अपने देश में काम करने वाले विदेशी नागरिकों को वीजा देने के नियमों को कठोर किया है। अमेरिका अपने देश के नागरिकों को रोजगार देने के मुद्दे पर विदेशी नागरिकों को अपने यहां नौकरी देने में रोड़े अटकाता हुआ दिख रहा है। लेकिन यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था का दारोमदार सेवा क्षेत्र पर ही टिका हुआ है। उनकी कुल जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान 70 प्रतिशत तक है। ऐसे में यूरोपीय देशों की सेवा प्रदाता कंपनियों को भारत में सस्ते कुशल कामगार उपलब्ध होंगे। इससे भारत सहित यूरोप को भी बड़ा लाभ होने की संभावना है।
अमेरिका ने जताई नाराजगी
अमेरिका अब तक भारत पर रूस से तेल खरीद को रोकने के लिए महंगे टैरिफ लगा रहा था। उसका यह दांव कारगर होता भी दिखाई पड़ा क्योंकि रिलायंस सहित अनेक भारतीय कंपनियों ने रूस से तेल खरीद में भारी कटौती की है। ट्रंप इसी तरह की धमकी यूरोप को भी दे रहे थे। लेकिन भारत से यूरोपीय यूनियन के समझौते पर अमेरिका ने जिस तरह की नाराजगी दिखाई है, उससे यह साफ साबित हो रहा है कि अमेरिका को कहीं न कहीं अपने हाथ से बाजी निकलती दिखाई दे रही है। अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था की मजबूती के बल पर यूरोप के देशों पर धौंस दिखा रहा था, लेकिन यूरोप को भारत के रूप में बड़ा और सस्ता बाजार मिलने से अमेरिका को अपनी चालें नाकाम होती दिखाई दे रही हैं।
ट्रंप का दांव फ्लॉप होने का खतरा?
ट्रंप सरकार में ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने इसे 'यूरोप का अमेरिका को दिया गया धोखा' करार दिया है। उन्होंने कहा है कि यह डील करके यूरोप ने उस युद्ध को अप्रत्यक्ष तरीके से फाइनेंस करने का काम कर रहा है जो उसी के खिलाफ लड़ा जा रहा है। अमेरिका यूरोपीय देशों से भारत में रूस के तेल से बने पेट्रो उत्पादों की खरीद को भी रोकने की बात कर रहा था। अमेरिका भारत की तरह यूरोपीय देशों पर भी रूसी तेल खरीदने पर रोक लगाने के लिए टैरिफ लगाने की बात कर रहा था। लेकिन भारत के रूप में यूरोप को बड़ा बाजार मिलने से इस टैरिफ का महत्त्व लगभग समाप्त हो सकता है।
एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा लाभ
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि इस डील के होने से भारत के सबसे कमजोर वर्ग के लोगों और एमएसएमई सेक्टर को लाभ होने की संभावना है। भारत आज भी अमेरिका-यूरोप को तैयार कृषि उत्पाद, कपड़े और दवाइयां निर्यात करता है। कपड़े और कृषि उत्पादों के मामले में देश का सबसे कमजोर या मध्य वर्ग ही काम करता है। ऐसे में यूरोपीय देशों से व्यापार में वृद्धि होने से इस वर्ग को सीधा लाभ होने की संभावना है। इससे इन सेक्टरों में रोजगार निर्माण में भी बढ़ोतरी होने की संभावना है।
भाजपा ने किया स्वागत
यूरोपीय यूनियन से हुई इस डील का भाजपा ने स्वागत किया है। पार्टी के कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि ये डील भारत-यूरोप के 200 करोड़ लोगों के लिए लाभ का सौदा साबित होने वाली है। उन्होंने कहा कि इससे रोजगार और निर्यात में बढ़ोतरी होगी और कृषि क्षेत्र को मदद मिलेगी। उन्होंने इसे बड़ी डील करार देते हुए कहा कि यह केवल भारत-यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था को ही प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा।