भारत में काला धन पिछले कुछ समय में कम जरूर हुआ है, लेकिन अब भी यह कुल जीडीपी का 20 प्रतिशत है। एक नई स्टडी के मुताबिक, भारत में काले धन की अर्थव्यवस्था 30 लाख करोड़ रुपए की है। यह आंकड़ा थाईलैंड और अर्जेंटीना जैसे देशों की कुल अर्थव्यवस्था से भी ज्यादा है।
एंबिट कैपिटल की इस रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद कैपिटल कॉस्ट बढ़ने से लेंडिंग रेट (उधार देने की प्रवृत्ति) में इजाफा हुआ है। पिछले एक साल में लेंडिंग रेट 24 से बढ़कर 34 फीसदी हो गया।
रिपोर्ट के अनुसार, 1970 और 1980 के दशक में इंडियन ब्लैक इकोनॉमी काफी बढ़ गई थी। हालांकि, सख्ती से इसकी स्पीड सुस्त जरूर पड़ी है, लेकिन अब भी यह जीडीपी का 20 फीसदी है। 2016 में भारत की जीडीपी 2.3 लाख करोड़ डॉलर रहने का अनुमान है, जबकि ब्लैकमनी 30 लाख करोड़ रुपए है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद ब्लैक इकोनॉमी पर काफी लगाम कसी है। गोल्ड ट्रांजेक्शन पर काफी चेकिंग बैठाने से ये काफी कठिन हुआ है।
अब काली कमाई से सोना खरीदने में भी मुश्किल हैं। हालांकि इसकी और वजहें भी हैं। जमीन, रियल एस्टेट और सोने की कीमतों में गिरावट को भी एक कारण बताया जा रहा है।