एनएसजी में भारत की उम्मीदों पर चीन ने पानी फेर दिया पर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में उसकी एंट्री की प्रक्रिया शुरू हो गई है। शुक्रवार को भारत ने प्रमुख एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ ऑब्लिगेशंस) पर हस्ताक्षर किया, जिससे एससीओ में औपचारिक तौर पर पूर्ण सदस्य बनने की अंतिम प्रक्रिया की शुरुआत हुई।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एससीओ में भारत की सदस्यता से क्षेत्र को कट्टरता और हिंसा के खतरों से निपटने में मदद मिलेगी। इससे सुरक्षा भी मजबूत होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम आतंकवाद को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएंगे। प्रधानमंत्री ने एससीओ में नए सदस्य के तौर पर पाकिस्तान का भी स्वागत किया।
इस शक्तिशाली संगठन को नाटो के समतुल्य माना जाता है। एससीओ सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) सुजाता मेहता ने दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया।
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हालांकि सदस्यता की प्रक्रिया पूरी करने के लिए भारत को एक साल में 30 अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने होंगे। गौर करने वाली बात है कि भारत के साथ-साथ पाकिस्तान को भी एससीओ का पूर्ण सदस्य बनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने संगठन में पाकिस्तान का भी किया स्वागत
- फोटो : PTI
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह साझेदारी क्षेत्र को कट्टरता, हिंसा और आतंकवाद के खतरों से बचाएगी और उसके आर्थिक विकास को संचालित करेगी। एससीओ सम्मेलन में अपने भाषण में मोदी ने कहा कि ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन के क्षेत्र में समूह की ताकत से भारत को महत्वपूर्ण लाभ होगा और बदले में भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था और बड़ा बाजार एससीओ क्षेत्र में आर्थिक विकास को संचालित कर सकता है।
पीएम ने कहा, ‘हमारी साझेदारी हमारे समाज को नफरत, हिंसा और आतंकवाद की कट्टरपंथी विचारधाराओं के खतरों से बचाएगी। भारत इस लक्ष्य की दिशा में काम करने के लिए एससीओ के सदस्य देशों के साथ एकजुट होगा और हम सभी स्तरों पर आतंकवाद से लड़ने में कतई बर्दाश्त नहीं करने वाला रवैया और व्यापक सोच अपनाएंगे।’
मोदी ने कहा कि हम एससीओ की सदस्यता के लिए भारत को जबरदस्त समर्थन देने के लिए सदस्य देशों और उनके नेताओं के आभारी हैं।
गहरी आर्थिक साझेदारी की वकालत करते हुए मोदी ने कहा कि व्यापार, निवेश, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कृषि, स्वास्थ्य सुविधाओं, लघु एवं मध्यम उद्योगों में भारत की क्षमताएं एससीओ के देशों रूस, चीन, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान को व्यापक आर्थिक लाभ पहुंचा सकती है।
उन्होंने कहा, ‘हम 40 प्रतिशत मानव जाति और एक अरब से अधिक युवाओं का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस समूह में भारत एससीओ के दर्शन के अनुरूप सिद्धांतों को जोड़ता है। भारत ने हमेशा यूरेशियाई धरती के लोगों के साथ अच्छे संबंध रखे हैं।’
शास्त्री जी का जीवन सभी भारतीयों के लिए प्रेरणास्त्रोत
शंघाई सहयोग संगठन में भाग लेने पहुंचे हैं प्रधानमंत्री
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वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के जीवन को सभी भारतीयों के प्रेरणास्त्रोत बताया। उन्होंने ताशकंद में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह बात कही।
प्रधानमंत्री शंघाई सहयोग संगठन में भाग लेने की लिए गुरुवार को उज्बेकिस्तान पहुंचे। उन्होंने यहां पर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि अर्पित की। गौरतलब है कि 1966 में 61 वर्ष की अवस्था में शास्त्री जी की मृत्यु ताशकंद में दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। वह आधिकारिक दौरे पर ताशकंद आए थे।
प्रधानमंत्री ने श्रद्धाजंलि देने के बाद ट्वीट किया कि लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन सभी भारतीयों के लिए प्र्रेरणास्त्रोत है, महान व्यक्तित्व को श्रद्दांजलि अर्पित किया। शास्त्री जी जवाहर लाल नेहरू की मृत्यु के बाद 1964 में प्रधानमंत्री बने थे। उन्हें जय जवान-जय किसान जैसा लोकप्रिय नारा देने के लिए भी याद किया जाता है।
शास्त्री जी ने अन्न के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने के लिए किसानों को अधिक अन्न उपजाने और 1965 में भारत-पाक युद्ध में सैैनिकों का उत्साह बढ़ाने के लिए यह नारा दिया था। प्रधानमंत्री ने शास्त्री जी की प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार से भी मुलाकात की।