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India-Russia Ties: रुपया-रूबल भुगतान प्रणाली पर सहमति, निवेश प्रोत्साहन समझौते को भी मिली रफ्तार

Sat, 06 Dec 2025 07:59 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत और रूस ने अपने बीच व्यापार को निर्बाध बनाने के लिए रुपये-रूबल में द्विपक्षीय भुगतान प्रणाली विकसित करने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाओं और लॉजिस्टिक समस्याओं को दूर कर व्यापार बढ़ाने का फैसला किया। ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े सहयोग को मान्यता देते हुए तेल, गैस, पेट्रोकेमिकल और बुनियादी ढांचे में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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पुतिन और पीएम मोदी की मुलाकात - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत-रूस व्यापार निर्बाध बनाए रखने के लिए अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं रुपये व रूबल में द्विपक्षीय भुगतान प्रणाली विकसित करने पर सहमत हुए हैं। शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में पीएम मोदी व पुतिन ने निवेश प्रोत्साहन और संरक्षण पर पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते के लिए बातचीत में तेजी लाने पर भी जोर दिया है।

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भारत से रूस को निर्यात बढ़ाने सहित, संतुलित और सतत तरीके से द्विपक्षीय व्यापार का विस्तार करने पर सहमत। दोनों पक्ष टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार आैर रसद में आने वाली बाधाओं को दूर करने, सुचारू भुगतान तंत्र और 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर के संशोधित द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को समय पर प्राप्त करने के लिए बीमा    और पुनर्बीमा के मुद्दों के लिए    समाधान खोजेंगे।

तेल और तेल उत्पाद, तेल शोधन और पेट्रोकेमिकल प्रौद्योगिकी, तेल क्षेत्र सेवाएं, अपस्ट्रीम प्रौद्योगिकी और संबंधित बुनियादी ढांचा, एलएनजी और एलपीजी से संबंधित बुनियादी ढांचा आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय-रूसी कंपनियों के बीच वर्तमान और संभावित सहयोग को भी स्वीकार किया। ऊर्जा साझेदारी के मोर्चे पर, दोनों पक्षों ने ऊर्जा क्षेत्र में अपने व्यापक सहयोग पर चर्चा की और इसे विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
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परिवहन गलियारों में सहयोग गहरा करेंगे
भारत और रूस ने स्थिर और कुशल परिवहन गलियारों के निर्माण में सहयोग को गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। इसमें अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी), चेन्नई-व्लादिवोस्तोक गलियारे और उत्तरी समुद्री मार्ग का समर्थन करने के लिए कनेक्टिविटी में सुधार व बुनियादी ढांचे की क्षमता बढ़ाने के लिए रसद लिंक का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई का आह्वान
साझा बयान में पीएम मोदी व पुतिन ने आतंकवादियों की सीमा पार गतिविधियों, आतंकवादी वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित ठिकानों सहित, सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद को रोकने और उसका मुकाबला करने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि की। बयान में कहा गया है, 22 अप्रैल को भारत में पहलगाम और 22 मार्च, 2024 को मॉस्को के क्रोकस सिटी हॉल में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई।

अल-कायदा, आईएस/दाएश पर सख्ती
दोनों नेताओं ने अल-कायदा, आईएस/दाएश और उनके सहयोगियों सहित सभी संयुक्त राष्ट्र-सूचीबद्ध आतंकवादी समूहों और संस्थाओं के खिलाफ ठोस कार्रवाई का आह्वान किया। इसका उद्देश्य आतंकियों के ठिकानों को खत्म करना, वित्तपोषण चैनलों, अंतरराष्ट्रीय अपराध के साथ गठजोड़ को खत्म करना और आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही को रोकना है।

दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के ठोस आधार पर, बिना किसी छिपे एजेंडे और दोहरे मानदंडों के, इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के महत्व को रेखांकित करते हुए अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और उग्रवाद के विरुद्ध अडिग लड़ाई का आह्वान किया। नेताओं ने प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्तावों और संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति के कार्यान्वयन के महत्व पर भी बल दिया। आतंकवाद का मुकाबला करने में राज्यों और उनके सक्षम प्राधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी पर बल दिया।

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पीएम मोदी ने रूसी सेना में भारतीयों का मुद्दा उठाया
राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा पर विशेष ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, कहा कि भारत रूस के सशस्त्र बलों में शामिल हुए अपने नागरिकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है और पीएम मोदी ने पुतिन के साथ शिखर बैठक में भी यह मुद्दा उठाया। पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि रूसी सेना से भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई सुनिश्चित करने के लिए हमारे ठोस प्रयास नियमित रूप से जारी हैं।

मिसरी ने भारतीयों को रूसी सेना में शामिल होने के प्रस्तावों को स्वीकार करने के प्रति आगाह किया। कहा, हमारे नागरिकों को रूसी सशस्त्र बलों में शामिल होने के किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से बचना चाहिए। हम वहां फंसे लोगों के कई मामले देख रहे हैं, जो बचाए जाने और बाहर निकाले जाने की अपील कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि 127 भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए जिसमें से 98 को निकाला गया जबकि 12 लापता हैं। मिसरी ने कहा, भारत ने पारस्परिकता के आधार पर रूसी नागरिकों के लिए 30-दिवसीय ई-पर्यटक निःशुल्क वीजा शुरू किया है।

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