भारत और रूस के बीच टू प्लस टू वार्ता में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन का नाम लिए बिना कहा कि उत्तरी सीमा पर अभूतपूर्व फौजी जमाव और बिना उकसावे के आक्रामकता भारत के लिए नई चुनौती है। उन्होंने कहा कि भारत ने मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और जनता की अंदरूनी ताकत के बल पर इन चुनौतियों का बखूबी सामना किया है।
इससे पहले रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोएगु के साथ ‘सैन्य एवं सैन्य-तकनीक सहयोग के क्षेत्र में भारत-रूस अंतर सरकारी आयोग’ (आईआरआईजीसी-एमएंडएमटीसी) की बैठक में राजनाथ सिंह ने रूस को भारत का पुराना, खास और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। उन्होंने भारत के मजबूत सहयोग के लिए रूस की सराहना की और कहा कि हमारे करीबी संबंध किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं हैं। आईआरआईजीसी-एमएंडएमटीसी को उन्होंने पिछले दो दशक में सुस्थापित मैकेनिज्म करार दिया। जनरल शोइगु ने इस मौके पर विश्वास जताया कि भारत और रूस की दोस्ती पूरे क्षेत्र में स्थिरता के लिए अहम है। पिछले कई दशकों में इस दोस्ती और साझेदारी ने कई नए आयाम हासिल किए हैं।
एस-400 पर भारत से अपना ‘आदेश’ मनवाना चाहता था अमेरिका: लावरोव
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सोमवार को कहा कि अमेरिका रूस के साथ एस-400 मिसाइल रक्षा खरीद सौद को लेकर भारत से अपना आदेश मनवाना चाहता था और इस सौदे को रद्द करवाना चाहता था। लेकिन भारत ने उन्हें बता दिया कि उसने अपनी रक्षा जरूरतों के अनुरूप एक स्वायत्त देश के रूप में ये फैसला लिया है और इसे बदला नहीं जाएगा। अमेरिका ने क्रीमिया में 2014 में रूसी दखल और 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कथित रूप से रूस के हस्तक्षेप के बाद एक कानून बनाया जिसके तहत रूस से बड़े हथियार समझौते करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता था। इसकी कानून के तहत भारत को भी एस-400 सिस्टम खरीदने पर प्रतिबंध की चेतावनी दी गई थी।
भारत-रूस साझेदारी से बहुध्रुवीय विश्व को मिलेगा संतुलन: जयशंकर
भारत रूस टू प्लस टू बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच कई अहम मुद्दों पर बात हुई। इस मौके पर जयशंकर ने कहा कि अफगानिस्तान के हालात मध्य एशिया क्षेत्र समेत पूरी विश्व पर असर डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बैठक आतंकवाद, हिंसक उग्रवाद समेत कई अन्य चुनौतियों का समाना करने की दिशा में अहम कदम साबित होगा। बहुध्रुवीय विश्व को नया संतुलन देने में भारत रूस की कूटनीतिक और सामरिक साझेदारी अहम है।
सुबह से शुरू हुआ मुलाकातों का दौर
सोमवार को सबसे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोएगु के बीच बैठक हुई। इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच वार्ता हुई। अंत में दोनों देशों के बीच रक्षा और विदेश मंत्रियों की उपस्थिति में टू प्लस टू बातचीत हुई। रक्षा मंत्रियों की बैठक के बाद रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।