केंद्र सरकार गंगा नदी बेसिन की सांस्कृतिक मैपिंग करवा रही है। इसके पूरे होने पर नदी बेसिन की प्राकृतिक विरासत के साथ एतिहासिक इमारतों, नृत्य, संगीत, कला व आजीविका आदि से जुड़े आंकड़े एक प्लेटफार्म पर होंगे। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ कैंपस में आयोजित इंडिया रिवर डे कार्यक्रम के दौरान ये बातें नमामि गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्र ने कहीं।
इस मौके पर देशभर के नदी जल विज्ञानी मौजूद थे। यह परियोजना केंद्र सरकार इंडियन नेशनल ट्रस्ट आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के साथ मिलकर कर रही है। राजीव रंजन मिश्र ने कहा कि नदियों के साथ आज लोगों का संपर्क बनाने की सख्त जरूरत है। सांस्कृतिक मैंपिंग इसका कारगर हथियार हो सकता है। इसके तैयार होने के बाद आम लोगों को ऑनलाइन प्लेटफार्म पर शहर विशेष व नदी के बीच के नए-पुराने सारे संपर्क सूत्र मिल जाएंगे।
दो साल में यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। इसके बाद पूरा गंगा नदी बेसिन एक क्लिक पर रहेगा। उन्होंने बताया कि गंगा नदी प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद यमुना की भी सांस्कृतिक मैंपिंग कराई जा सकती है। मिश्रा ने नमामि गंगा मिशन से जुड़े दूसरे प्रोजेक्ट पर भी चर्चा की। साथ ही विशेषज्ञों से अपील की कि वे इस काम में सरकार का सहयोग दें। देश की नदियों को बचाए रखना बहुत बड़ा काम है।
दूसरी तरफ पिछले साल के रिवर वीक में उठाए गए मसलों से जुड़ी एक रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया। रिपोर्ट के बारे में जानकारी देते हुए यमुना जिए अभियान के मनोज मिश्रा ने बताया कि किस तरह से गंगा व उसकी सहायक नदियों का जलप्रवाह कम होता जा रहा है। इसके पीछे की अहम वजह उन्होंने बांधों को बताया। उन्होंने रिपोर्ट में उठाए गए मसलों पर विस्तार से चर्चा की। जिसमें नदी की अविरलता और निर्मलता की पूरी कार्ययोजना पेश की गई है।