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पाकिस्तान-चीन सीमा आयोग पर भारत की कड़ी आपत्ति: कहा- इसका कोई कानूनी आधार नहीं; विदेश मंत्रालय ने और क्या कहा?

Wed, 16 Sep 2026 08:17 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत ने पाकिस्तान और चीन के तथाकथित सीमा संयुक्त आयोग को कानूनी आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को भी मान्यता नहीं देता और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख को भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है। भारत ने भारतीय क्षेत्रों से जुड़े किसी भी पाकिस्तान-चीन सीमा सहयोग को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। इस आयोग पर भारत ने इतनी कड़ी आपत्ति क्यों जताई?

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भारत ने पाकिस्तान-चीन के सीमा आयोग को क्यों खारिज किया? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच बनाए गए तथाकथित सीमा संयुक्त आयोग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने बुधवार को इस आयोग को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच ऐसी कोई मान्य सीमा नहीं है, जिसे भारत स्वीकार करता हो। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि इस मामले में भारत की स्थिति पहले से स्पष्ट और लगातार एक जैसी रही है। मंत्रालय ने कहा कि तथाकथित संयुक्त आयोग का कोई कानूनी आधार नहीं है।

भारत ने पाकिस्तान-चीन के सीमा आयोग को क्यों खारिज किया?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग से जुड़ी रिपोर्ट देखी है। भारत की स्थिति स्पष्ट है कि पाकिस्तान और चीन के बीच कोई मान्य सीमा नहीं है। इसलिए भारत इस तथाकथित संयुक्त आयोग को स्वीकार नहीं करता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस आयोग की कोई कानूनी वैधता नहीं है। भारत ने यह भी दोहराया कि वह 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं देता रहा है और लगातार इसे अवैध और अमान्य बताता रहा है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर भारत ने क्या कहा?

भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर भी अपना रुख दोहराया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को उन भारतीय क्षेत्रों को लेकर किसी तरह की व्यवस्था करने का अधिकार नहीं है, जिन पर उसका अवैध और जबरन कब्जा है। विदेश मंत्रालय ने इसी आधार पर पाकिस्तान के किसी भी ऐसे कदम को खारिज किया है, जिसमें भारतीय क्षेत्र से जुड़े मामलों में पाकिस्तान और किसी दूसरे देश के बीच सहयोग की बात हो।

1963 के चीन-पाकिस्तान समझौते पर भारत का क्या रुख है?

भारत ने स्पष्ट किया कि उसने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत लगातार इस समझौते को अवैध और अमान्य मानता रहा है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति बदलने या अवैध कब्जे को वैध ठहराने की किसी भी कोशिश का भारत दृढ़ता से विरोध और खंडन करता है। भारत के अनुसार, ऐसी कोई भी गतिविधि उसकी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को प्रभावित करने वाली होगी।

भारतीय क्षेत्रों को लेकर पाकिस्तान-चीन की किसी व्यवस्था पर भारत ने क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय क्षेत्रों से जुड़े पाकिस्तान और चीन के बीच किसी भी तथाकथित सीमा सहयोग को भारत पूरी तरह अस्वीकार्य मानता है। मंत्रालय के अनुसार, ऐसी किसी व्यवस्था का भारत की इन क्षेत्रों पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ऐसी कोशिशों का दृढ़ता से विरोध करता है। उन्होंने पाकिस्तान से कहा कि इस तरह की गतिविधियों के बजाय उसे भारतीय क्षेत्रों पर अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले इलाकों को तुरंत खाली करना चाहिए।

भारत ने पाकिस्तान को क्या संदेश दिया?

भारत ने अपने बयान में पाकिस्तान से सीधे तौर पर कहा कि वह उन क्षेत्रों को तत्काल खाली करे, जो उसके अवैध और जबरन कब्जे में हैं। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान-चीन सीमा सहयोग को लेकर भारत की आपत्ति को दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमेशा भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से रहेंगे। भारत ने साफ कर दिया कि भारतीय क्षेत्रों से संबंधित किसी भी ऐसी व्यवस्था को उसकी संप्रभुता या क्षेत्रीय अखंडता पर कोई प्रभाव डालने वाला नहीं माना जाएगा। इस पूरे मामले में भारत ने अपनी स्थिति को स्पष्ट, लगातार और अपरिवर्तित बताया है।

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