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बीएसएफ: फैमिली पेंशन के लिए भटक रही 71 की लड़ाई में शामिल बीएसएफ सिपाही की बेटी, पीएम से लगाई गुहार

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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के दिवंगत सिपाही अटल बहादुर थापा (रेजिमेंट नंबर 667882719, 96 बटालियन), जिन्होंने 1971 की लड़ाई लड़ी थी, की बेटी लक्ष्मी राय फैमिली पेंशन के लिए भटक रही है। उनका यह संघर्ष 2556 दिन से जारी है। वे बीएसएफ, वेतन एवं लेखा प्रभाग 'सीमा सुरक्षा बल' और एसबीआई के चक्कर लगा रही हैं। उन्होंने अपनी तरफ से सभी दस्तावेज भी दे दिए हैं, लेकिन पेंशन नहीं मिल रही। अब चारों तरफ से निराश होकर लक्ष्मी राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर मदद की गुहार लगाई है। 

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लक्ष्मी राय ने अपने पत्र में लिखा है कि वह पिछले 12 साल से गंभीर आर्थिक कठिनाई का सामना कर रही है। उसके पिता पूर्व कांस्टेबल अटल बहादुर थापा, ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स में सेवा की थी। वे 1971 के भारत-पाक युद्ध के अनुभवी सैनिक थे। उन्होंने अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष, देश की सेवा में समर्पित कर दिए। अटल बहादुर थापा ने सम्मान और निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन किया। वे 30 नवंबर 1978 को रिटायर हुए थे।  

बतौर लक्ष्मी राय, वर्ष 2010 में मेरे पति का निधन हो गया। पति की मृत्यु के बाद, मैं आर्थिक रूप से अपने पिता पर निर्भर हो गई। अगस्त 2014 में मेरे पिता का भी निधन हो गया। इसके बाद परिवार के सामने एक बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया। पिता के निधन के बाद, लक्ष्मी राय ने संबंधित पेंशन नियमों के तहत बीएसएफ को फैमिली पेंशन शुरू कराने के लिए आवेदन भेजा। बीएसएफ की 96वीं बटालियन के अलावा पीएडी बीएसएफ, नई दिल्ली के संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया। इसके बाद सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अभी तक जारी है। 
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फिलहाल कदमतला, दार्जलिंग 'पश्चिम बंगाल' में रह रहीं लक्ष्मी राय ने बताया कि उन्हें किसी ने भी फैमिली पेंशन के बारे में नहीं बताया। उनके पिता के देहांत के बाद फैमिली पेंशन मिलने का प्रावधान है, बीएसएफ ने भी जानकारी नहीं दी। ऐसे ही पांच छह साल निकल गए। सात वर्ष पहले संबंधित अधिकारियों के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज जमा कराए गए, लेकिन फैमिली पेंशन नहीं मिल सकी। 96वीं बटालियन से जानकारी मिली कि मेरा फैमिली पेंशन का मामला आगे भेज दिया गया है। पीएडी बीएसएफ नई दिल्ली द्वारा इस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, मेरे पिता के निधन के बारह साल से ज़्यादा समय बीत जाने के बाद भी, इस मामले का कोई नतीजा नहीं निकला है। इतनी लंबी देरी के कारण मैं बहुत मुश्किल और कमजोर आर्थिक स्थिति में आ गई हूं। 

फिलहाल, मैं सिलीगुड़ी, उत्तरी बंगाल में घरों में घरेलू काम, जैसे बर्तन धोना, कपड़े धोना, फ़र्श साफ करना और खाना बनाना, आदि से अपनी आजीविका चलाने को मजबूर हूं। पीएम को भेजे अपने पत्र में लक्ष्मी ने लिखा, मैं अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और सम्मान के साथ जीने के लिए संघर्ष कर रही हूं। यह बहुत दुखद है कि 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान देश की सेवा करने वाले बीएसएफ के एक पूर्व सैनिक की बेटी आज इतनी गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करने को मजबूर है। फैमिली पेंशन का केस वर्षों से लंबित पड़ा है। मैंने संबंधित कार्यालयों से इस उम्मीद में संपर्क किया कि मेरे मामले का समाधान लागू नियमों के अनुसार हो जाएगा। असाधारण देरी के कारण अब मेरे पास कोई उपाय नहीं बचा है।

इतनी लंबी प्रशासनिक देरी के कारण मुझे बहुत परेशानी हुई है। मैं उस आर्थिक सहायता से वंचित रह गई हूं, जिसकी मांग मैं अपने पिता की मृत्यु के बाद से कर रही हूं। मैं आपके कार्यालय से विनम्र अनुरोध करती हूं कि कृपया इस मामले में हस्तक्षेप करें। इस बाबत संबंधित अधिकारियों, विशेष रूप से निदेशक, पीएडी बीएसएफ और डीजी बीएसएफ, नई दिल्ली को निर्देश दिया जाए। अगस्त 2014 से, या लागू नियमों के तहत सक्षम पेंशन अधिकारी द्वारा तय की गई किसी अन्य तारीख से, पारिवारिक पेंशन की बकाया राशि (एरियर) जारी की जाए। इस बात की जांच करें कि क्या मेरे मामले की प्रक्रिया में हुई लंबी देरी के लिए कोई अधिकारी या प्रशासनिक चूक जिम्मेदार है। 
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