आवासीय संपत्तियों के दाम बढ़ने के लिहाज से भारत जुलाई-सितंबर तिमाही में ‘ग्लोबल हाउस प्राइज इंडेक्स’ में सात स्थान फिसलकर 54वें स्थान पर आ गया है। 2019 की समान तिमाही वह 47वें स्थान पर रहा था।
सलाहकार फर्म नाइटफ्रैंक ने अपनी ताजा शोध में कहा है कि मकान की कीमतों में सलाना आधार पर 2.4 फीसदी की गिरावट आने के कारण भारत के सूचकांक में गिरावट आई है। भारत पिछली तिमाही में भी इस सूचकांक में 54वें पायदान पर रहा था। ‘ग्लोबल हाउस प्राइज इंडेक्स’ में दुनियाभर के 56 देशों एवं क्षेत्रों की आवासीय संपत्तियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का आकलन किया जाता है।
नाइटफ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष एवं एमडी शिशिर बैजल ने कहा, महामारी के प्रतिकूल आर्थिक प्रभावों का मुकाबला करने के लिए रियल एस्टेट डेवलपर अपनी विपणन नीतियों में बदलाव कर रहे हैं। इसमें खरीदारों को आकर्षित करने के लिए वित्तीय लाभ, छूट और आसान भुगतान विकल्प देना शामिल है।
तुर्की शीर्ष पर, मोरक्को सबसे नीचे...
तुर्की इस सूची में शीर्ष पर है। वहां मकानों की कीमतें जुलाई-सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 27.3 फीसदी बढ़ी हैं। न्यूजीलैंड दूसरे स्थान पर है, जहां दाम 15.4 फीसदी बढ़े हैं। लक्जमबर्ग में कीमतें 13.4 फीसदी बढ़ी हैं। सूचकांक में मोरक्को का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। यहां मकान की कीमतों में 3.3 फीसदी की गिरावट रही। आयरलैंड, स्पेन, भारत और हांगकांग का प्रदर्शन भी अच्छा नहीं रहा है।