विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत का रूस के साथ 60 साल पुराना रिश्ता है और यह व्याख्या करना सही नहीं है कि इस रिश्ते से नई दिल्ली को कोई बाधा है। एक प्रौद्योगिकी सम्मेलन में उनकी टिप्पणी यूक्रेन में युद्ध के बावजूद मजबूत भारत-रूस संबंधों को लेकर पश्चिमी शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में आई थी।
उन्होंने कहा, 'हम जरूरत से ज्यादा निर्भर हैं या नहीं, वास्तव में दिन के अंत में यह हम पर निर्भर करता है।' जयशंकर ने दोनों पक्षों के बीच जुड़ाव के ऐतिहासिक पहलुओं का भी जिक्र किया।
एस जयशंकर ने कहा कि अगर आप यूरेशियन भूभाग को देखें तो यह समझ में आता है कि भारत और रूस के बीच मजबूत संबंध होंगे, क्योंकि यह आपके पड़ोसी के पड़ोसी की राजनीति के पहले सिद्धांत के अनुरूप है।
हम कई क्षेत्रों में बना रहे पकड़
भारत की आर्थिक प्रगति के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि देश कई मायनों में आगे बढ़ रहा है क्योंकि सुधार का युग जरूरी नहीं कि प्रौद्योगिकी का युग हो। उन्होंने तर्क दिया, 'हम कई क्षेत्रों में पकड़ बना रहे हैं। हम पकड़ बना रहे हैं क्योंकि सुधार का हमारा युग तीन दशक पहले शुरू हुआ था।
उन्होंने कहा, 'हमने सुधार की संकल्पना बहुत संकीर्ण संदर्भ में की। हम शायद उतने महत्वाकांक्षी और व्यापक नहीं थे, जितना हमें होना चाहिए था। इसलिए इसका बहुत कुछ संकीर्ण परिभाषित अर्थशास्त्र में समाप्त हो गया, जिसमें से अधिकांश व्यापार और कुछ हद तक निवेश के आसपास केंद्रित था।'
यूपीआई लेनदेन के बढ़ते उपयोग पर भी डाला प्रकाश
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण और वितरण के प्रयासों को प्रधानमंत्री प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण कहते हैं। आज, औसत व्यक्ति न केवल इसका उपयोग करता है बल्कि इससे जुड़ता भी है। साथ ही उन्होंने यह तर्क देने के लिए यूपीआई लेनदेन के बढ़ते उपयोग पर भी प्रकाश डाला कि कैसे लोग आसानी से प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं।