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करतारपुर कॉरिडोर पर चर्चा को भारत-पाक तैयार, 14 जुलाई को होगी बैठक

Sat, 13 Jul 2019 05:13 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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करतारपुर कॉरिडोर (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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भारत और पकिस्तान के विशेषज्ञ करतारपुर कॉरिडोर के स्वरूप को अंतिम रूप देने के लिए मसौदा समझौता पर चर्चा करने को लेकर रविवार को वाघा सीमा पर बैठक करेंगे। दोनों देश इस संबंध में तकनीकी मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। यह कॉरिडोर पाकिस्तान के करतारपुर स्थित दरबार साहिब को गुरदासपुर जिला स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारा से जोड़ेगा और भारतीय सिख श्रद्धालुओं की वीजा मुक्त आवाजाही को सुगम बनाएगा। श्रद्धालुओं को महज करतारपुर साहिब की यात्रा के लिए परमिट हासिल करनी होगी, जिसे सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव ने वर्ष 1522 में स्थापित किया था। 

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करतारपुर गलियारे से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधि रविवार को अटारी-वाघा सीमा पर बैठक करेंगे। साथ ही जीरो प्वाइंट पर संपर्क और यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर भी चर्चा की जाएगी। सरकारी सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। 

सूत्रों ने बताया कि भारत सुरक्षा पहलुओं से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाएगा। भारत ने इससे पहले इस परियोजना पर पाकिस्तान द्वारा नियुक्त कमेटी में कई खालिस्तानी अलगाववादियों की मौजूदगी पर अपनी चिंताओं से पाक को अवगत कराया था। सूत्रों ने बताया कि बैठक में करतारपुर गलियारे के स्वरूप और संबद्ध तकनीकी मुद्दों पर चर्चा होगी। 
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यह गलियारा सिख श्रद्धालुओं को गुरदासपुर जिला स्थित डेरा बाबा नानक साहिब से पाकिस्तान के करतारपुर स्थित गुरूद्वारा दरबार साहिब तक जाने को सुगम बनाएगा। 

सूत्रों ने बताया कि भारत की सीमा में फोर लेन राजमार्ग बनाने पर काम जोरशोर से जारी है। राष्ट्रीय राजमार्ग 354 तक गलियारा के जीरो प्वाइंट को जोड़ने वाले इस राजमार्ग का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा किया जा रहा है। 

सूत्रों ने बताया कि भारत जीरो प्वाइंट पर एक पुल बना रहा है और उसने पाकिस्तान से अपनी ओर इसी तरह का एक पुल बनाने का अनुरोध किया है, जो श्रद्धालुओं को सुरक्षित आवाजाही मुहैया करेगा तथा बाढ़ से जुड़ी चिंताओं का हल करेगा। यह पुल एक क्रीक (जल धारा) के ऊपर है जिसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में पड़ता है। 

सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान ने कहा है कि वह मिट्टी का तटबंध बनाएगा, यह कदम न सिर्फ भारतीय इलाके में बाढ़ को आमंत्रण देगा बल्कि पुल के ढांचे को भी खतरा पैदा करेगा। 

मॉनसून के दौरान जब रावी नदी उफान पर होती है तब इस क्रीक में बाढ़ आ जाती है। सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान का प्रस्ताव तटबंध पर एक सड़क बनाने का भी है। उन्होंने कहा कि यह कदम भारत के लिए अस्वीकार्य है क्योंकि यह बारहमासी सड़क नहीं होगी

भारत सरकार इस बात के लिए उत्सुक है कि गुरु नानक देव जी की 550वीं वर्षगांठ के अवसर पर करतारपुर कॉरिडोर दोनों तरफ से पूरा हो जाए। भारत अपनी तरफ से पूरी उम्मीदों के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत विशेष अवसरों पर 10,000 तीर्थयात्रियों और प्रतिदिन 5000 तीर्थयात्रियों को यहां पूरा सहयोग देने की तैयारी में जुटा हुआ है। 
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