भले ही वर्तमान में भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट की पिच पर भी रिश्ते टूटे हुए हैं, लेकिन दशकों तक क्रिकेट ही दोनों देशों के बीच जुड़ाव का काम भी करती रही। ऐसे में पूर्व क्रिकेट कप्तान इमरान खान के रूप में पहली बार किसी क्रिकेटर के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने से संबंधों पर जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद हर कोई लगा रहा है। इमरान ने भारत के साथ अच्छे रिश्तों की वकालत की है, लेकिन उन पर फौज के साथ मिलकर राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे विदेशी मामलों के विशेषज्ञों की नजर में भी इमरान के पाकिस्तान की ‘कप्तानी’ करने से आने वाले दिनों में रिश्तों के सुलझने नहीं बल्कि और उलझने के आसार लग रहे हैं।
पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने इमरान के प्रधानमंत्री बनने पर तीखी प्रक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि केवल प्रधानमंत्री बदलने से किसी देश की नीयत और नीति नहीं बदल जाती है। पाकिस्तान का रवैया भारत को लेकर बदला या नहीं, इसका कोई संकेत नहीं है। उन्होंने इमरान का नाम लिए बिना कहा, पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री जिस सोहबत में रहे हैं, उससे बहुत ज्यादा कोई उम्मीद नहीं बनती है कि वह आकर कोई बड़ा बदलाव करेंगे।
दूसरी बात यह है कि अभी पाकिस्तान से खबरें आ रही हैं कि सेना ने उन्हें इस पद पर बिठाया है। इसलिए वह सेना के कंट्रोल में चलेंगे, चरमपंथियों ने चुनाव में मदद की है। लिहाजा उनके अनुसार भी व्यवहार करेंगे। इसलिए बहुत उम्मीद नहीं है कि भारत-पाक के रिश्तों में कुछ सुधार होगा। पाकिस्तानी मामलों के रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने भी कहा कि भारत-पाक के रिश्तों में इमरान खान की कोई भूमिका नहीं होगी, क्योंकि वे सेना और आतंकियों के मोहरे हैं।
अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए पाकिस्तान की फौज, आतंकवादियों और आईएसआई ने मिलकर कठपुतली प्रधानमंत्री बनाया है। उल्टे पाकिस्तान में नए प्रधानमंत्री के आने पर हमें और सजग रहना होगा। वैसे अभी पाकिस्तान के सामने अपनी ही बहुत सी चुनौतियां हैं। भारत को लेकर पाकिस्तान की नीति, वहां की आर्थिक नीतियां, वहां की विदेश, परमाणु और सैन्य नीति, लेकिन सब पर सेना का प्रभुत्व है।
चुनी सरकार तो केवल चेहरा है। वैसे भी इमरान प्रधानमंत्री बनने से पहले चुनावी भाषण में नवाज के भारत से संबधों को लेकर कड़वाहट घोलते रहे हैं। ऐसे में वह कभी नहीं चाहेंगे कि पाकिस्तान की अवाम के सामने उनकी छवि ऐसी बने, जिससे लगे कि वह भारत के सामने झुक गए हैं। इसलिए ऐसा लगता नहीं है कि इमरान के सत्ता आने के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में कुछ खास बदलाव आएगा।