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भारत कॉरपोरेट धोखाधड़ी की 'मेरिट लिस्ट' में थर्ड

Mon, 27 Jun 2016 01:57 PM IST
बीबीसी
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कॉरपोरेट धोखाधड़ी - फोटो : BBC
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भारत में प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री और नेता भले ही लगातार कॉरपोरेट धोखाधड़ी को कम करने का दावा कर रहे हों लेकिन एक अमरीकी संस्था क्रॉल इंक की ओर से दुनिया भर में कराए गए सर्वेक्षण में पता चला है कि भारत में होने वाली कॉरपोरेट धोखाधड़ी में भ्रष्टाचार और घूस का हिस्सा 25 फीसद से अधिक है।
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क्रॉल और इकॉनामिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट की ओर से कराए गए इस संयुक्त सर्वेक्षण में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनियों में काम करने वाले दुनियाभर के 768 एग्जक्यूटिव ने हिस्सा लिया।

यह सर्वेक्षण साल 2015 से मार्च 2016 के दौरान किया गया। सर्वेक्षण में शामिल तीन चौथाई लोगों ने पिछले साल अपनी कंपनियों में धोखाधड़ी का सामना करने की बात स्वीकार की। वहीं भारत में ऐसे लोगों की संख्या 80 फीसद थी।
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2013-2014 में ऐसी कंपनियों की संख्या 69 फीसद थी। इस दौरान 92 फीसद कंपनियों में धोखाधड़ी का पता लगा

कॉरपोरेट धोखाधड़ी - फोटो : BBC
 क्राल की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सर्वेक्षण में शामिल देशों में भारत उन देशों में शामिल है, जहां धोखाधड़ी की समस्या सबसे बड़ी है।

रिपोर्ट की मुताबिक साल 2015-2016 में भारत की 80 फीसद कंपनियां धोखाधड़ी का शिकार हुईं। 2013-2014 में ऐसी कंपनियों की संख्या 69 फीसद थी। इस दौरान 92 फीसद कंपनियों में धोखाधड़ी का पता लगा। 2013-2014 में ऐसी कंपनियों की संख्या 71 फीसद थी।

क्राल की प्रबंध निदेशक और दक्षिण एशिया मामलों की प्रमुख रश्मि खुराना ने एक बयान में कहा हैं, ''आंतरिक धोखाधड़ी के मामले में इंडिया इंक बहुत अधिक संवेदनशील है। मुझे लगता है कि कंपनियों ने अब इस बात को समझना शुरू कर दिया है कि इस खतरें को कम करने के लिए कुछ किया जाना चाहिए।''
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