इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर जेनेवा स्थित भारत के स्थायी मिशन को इसकी जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दो टूक कहा, सीएए भारत का आंतरिक मामला है और यह कानून बनाने वाली भारतीय संसद के संप्रभुता के अधिकार से संबंधित है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने मंगलवार को कहा, जेनेवा में हमारे स्थायी मिशन को सोमवार शाम को यह बताया गया कि यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बेश्लेट के कार्यालय ने सीएए के खिलाफ भारतीय सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है।
हमारा स्पष्ट रूप से मानना है कि कोई भी विदेशी पक्ष का भारत की संप्रभुता से जुड़े मुद्दे पर कोई अधिकार नहीं बनता। हमारा रुख एकदम स्पष्ट है कि सीएए सांविधानिक रूप से वैध है और सांविधानिक मूल्यों का अनुपालन करता है। कुमार ने कहा, यह भारत के विभाजन की त्रासदी में सामने आए मानवाधिकार के मुद्दों के संबंध में हमारी ओर से जताई गई राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत लोकतांत्रिक देश है, जो कानून के मुताबिक चलता है। हम अपनी स्वतंत्र न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और हमें उसमें पूरा भरोसा है। सुप्रीम कोर्ट में हमारी मजबूत व कानूनी लिहाज से टिकने वाली स्थिति को जीत मिलेगी।