विदेशमंत्री ने कहा कि सरकार चीन के साथ बातचीत कर रही है।
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एनएसजी मुद्दे पर सरकार का रूख स्षष्ट करते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बुधवार को संसद में कहा कि भारत कभी भी परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं करेगा। विदेशमंत्री ने यह भी कहा कि भारत सरकार इस मसले पर चीन के साथ बातचीत कर रही है, ताकि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत को एंट्री मिल सके।
विदेश मंत्री ने कहा, 'अगर कोई एक बार किसी मसले पर सहमत नहीं है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह कभी भी इस पर सहमत नहीं होगा। सरकार इस मुद्दे पर चीन के साथ बातचीत कर रही है।'
सदन में एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत के दावे पर विपक्ष की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में सुषमा स्वराज ने अपना बयान दिया। हालांकि इसके साथ विदेशमंत्री ने अपनी सरकार के उन प्रयासों पर भी जोर दिया, जिसके जरिए सदन में जीएसटी बिल को पास कराने के लिए कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण टैक्स सुधारों के लिए यह बहुत जरूरी है।
विदेशमंत्री ने कहा कि एनपीटी पर दस्तखत को लेकर भारत अपने पहले के रूख पर कायम है। गौरतलब है कि भारत सरकार एनपीटी को भेदभावपूर्ण मानती है क्योंकि बहुत सारे देश इससे बाहर है और यह सिर्फ कुछ देशों का ग्रुप है।
दूसरी ओर चीन ने एनपीटी पर दस्तखत न करने को लेकर भारत की एनएसजी में सदस्यता का विरोध किया था। चीन ने भारत के मसले पर जनमत का विरोध किया था, जबकि परमाणु अप्रसार के मामले भारत का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है।
चीन ने एनएसजी की सदस्यता के मुद्दे पर भारत के मुकाबले पाकिस्तान को खड़ा कर दिया और कहा कि एनपीटी पर हस्ताक्षर ना करने वाले देश को सदस्यता देना वैध परमाणु शक्तियों पर सवाल खड़े कर देगा।