मणिपुर के मोरे में बने अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार होकर भारत और म्यांमार के बीच होने वाला सीमा व्यापार सोमवार दोपहर से ही ठप है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि सीमा पार एक संदिग्ध भारतीय उग्रवादी पर हमले के विरोध में वहां व्यापारिक गतिविधियां बंद हैं। इसकी वजह यह है कि आधिकारिक तौर पर भारत सरकार ने इस व्यापार पर कोई रोक नहीं लगाई है।
म्यांमार के नाफ्लांग में बने उक्त प्रवेश द्वार के बंद होने के बारे में पूछने पर म्यांमार के अधिकारियों ने कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया है। बीते रविवार शाम को पांच हथियारबंद लोगों ने नाम्फलांग में एक भारतीय उग्रवादी पर हमला किया था जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे किसी अज्ञात जगह ले जाया गया है। एक अन्य घटना में रविवार रात को ही सीमा पर एक बम विस्फोट हुआ। इससे स्थानीय लोगों में आतंक फैल गया और जवाबी हमलों की आशंका से कई लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं।
सूत्रों ने बताया कि म्यांमार के अधिकारियों को अंदेशा है कि व्यापारी या पर्यटक के तौर पर कुछ उग्रवादी सीमा पार कर सकते हैं। इसी वजह से गेट को बंद कर दिया गया है। सीमा व्यापार ठप होने की वजह से मोरे में सभी होटल खाली पड़े हैं। मोरे गए राजधानी के व्यापारियों को भी खाली हाथ लौटना पड़ा है। इसके चलते ट्रांस-एशियन हाइवे नंबर 102 पर ट्रकों की लंबी कतार लगी हुई है। मोरे से लौटे व्यापारियों का कहना है कि म्यांमार के अधिकारी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के बाद ही गेट खोलेंगे। सीमा व्यापार ठप होने की वजह से पूर्वोत्तर के विभिन्न इलाकों में विदेशी चीजों की कीमतें आसमान छूने लगी है।