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एक साल में इसरो ने झेलीं दो बड़ी असफलताएं, अब चंद्रयान-2 मिशन भी टला

Sun, 05 Aug 2018 08:39 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत और इजरायल के बीच चांद पर पहुंचने वाले दुनिया के चौथा देश बनने की रेस लगी हुई है। बीते साल तक तो लग रहा था कि साल 2018 में भारत का ये सपना पूरा हो जाएगा लेकिन अब इस सपने को झटका लगा है। देश का सबसे महत्वकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 एक बार फिर से टाल दिया गया है। इसे इसी साल अक्तूबर के पहले सप्ताह में भेजा जाना था लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के चलते ऐसा नहीं हो पाएगा। बताया जा रहा है कि इसे अब दिसंबर 2018 तक टाल दिया गया है। इस मिशन के दौरान इसे पिछले साल 23 अप्रैल को भेजा जाना था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि भारत का ये सपना अब जनवरी 2019 में ही पूरा हो पाएगा।

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पहले नंबर पर है अमेरिका

बता दें चांद पर पहुंचने वाले तीन देशों की लिस्ट में पहले नंबर पर अमेरिका, दूसरे पर रूस और तीसरे पर चीन है। अब दो एशियाई देशों के बीच प्रतियोगिता हो रही है कि कौन चौथा स्थान हासिल करेगा। अब यह देखने वाली बात होगी कि इजरायल भारत से पहले चांद पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा पाता है या नहीं।

जानकारी के लिए बता दें यह भारत की दूसरी चांद यात्रा है। इसके अलावा भारत के मून रोवर की पहली तस्वीर भी इसरो के 800 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट चंद्रयान-2 मिशन का ही अहम हिस्सा है। इसरो का कहना है कि चंद्रयान-2 पूरी तरह से विदेश में विकसित मिशन है। चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान का वजन करीब 3,290 किलोग्राम है और वह चांद के चारों ओर चक्कर लगाते हुए आंकड़े एकत्रित करेगा।
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सूत्रों के अनुसार चांद पर जीएसएलवी एमके 2 की बजाय तीन उतरेगा क्योंकि इस स्पेस्क्राफ्ट की क्षमता पहले वाले से ज्यादा है। जीएसएलवी एमके 2 के पास तीन टन उठाने की क्षमता है लेकिन जीएसएलवी एमके 3 के पास चार टन उठाने की क्षमता है।

मिशन पर खर्च हुए 800 करोड़ रुपये

इस मिशन पर कुल 800 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इससे पहले मंगलयान मिशन पर 470 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। 

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इससे पहले भी असफलताएं झेल चुका है इसरो

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक साल के भीतर दो बड़ी असफलताओं को झेल चुका है और ऐसे में चंद्रयान-2 मिशन को भी टालने का फैसला लिया गया है। इस साल की शुरुआत में इसरो ने सैन्य उपग्रह जीएसएटी-6ए प्रक्षेपित किया था लेकिन इस उपग्रह के साथ इसरो का संपर्क टूट गया था। इसके बाद इसरो ने फ्रेंच गुयाना से प्रक्षेपित होने वाले जीएसएटी-11 के प्रक्षेपण को यह कहते हुए टाल दिया था कि इसकी कुछ अतिरिक्त तकनीकी जांच की जाएगी।

पिछले साल सितंबर में आईआरएनएसएस-1एच नौवहन उपग्रह को लेकर जा रहे पीएसएलवी-सी39 मिशन अभियान भी असफल रहा था क्योंकि इसका हीट शील्ड नहीं खुलने की वजह से उपग्रह नहीं छोड़ा जा सका। इन दो बड़ी असफलता के बाद इसरो चंद्रयान-2 के साथ एहतियात बरत रहा है क्योंकि चंद्रयान-1 और मंगलयान मिशन के बाद चंद्रयान-2 इसरो के लिए एक बहुत बड़ा मिशन है। किसी भी खगोलीय पिंड पर उतरने का इसरो का यह पहला मिशन है।

अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, 'हम कोई भी जोखिम मोल नहीं लेना चाहते हैं।' उन्होंने बताया कि अब चंद्रयान-2 मिशन को जनवरी में रवाना किया जा सकता है। अप्रैल में इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने सरकार को अक्तबूर-नवंबर में होने वाले प्रक्षेपण को टालने की सूचना दी थी। चंद्रयान-2 की समीक्षा करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की समिति ने इस मिशन से पहले कुछ अतिरिक्त परीक्षण की सिफारिश की थी। चंद्रयान-2 चांद पर रोवर उतारने की इसरो की पहली कोशिश है। यह चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। चांद के इस हिस्से की ज्याद जांच-पड़ताल अब तक नहीं हुई है।
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