भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) एक साल के भीतर दो बड़ी असफलताओं को झेल चुका है और ऐसे में चंद्रयान-2 मिशन को भी टालने का फैसला लिया गया है। इस साल की शुरुआत में इसरो ने सैन्य उपग्रह जीएसएटी-6ए प्रक्षेपित किया था लेकिन इस उपग्रह के साथ इसरो का संपर्क टूट गया था। इसके बाद इसरो ने फ्रेंच गुयाना से प्रक्षेपित होने वाले जीएसएटी-11 के प्रक्षेपण को यह कहते हुए टाल दिया था कि इसकी कुछ अतिरिक्त तकनीकी जांच की जाएगी।
पिछले साल सितंबर में आईआरएनएसएस-1एच नौवहन उपग्रह को लेकर जा रहे पीएसएलवी-सी39 मिशन अभियान भी असफल रहा था क्योंकि इसका हीट शील्ड नहीं खुलने की वजह से उपग्रह नहीं छोड़ा जा सका। इन दो बड़ी असफलता के बाद इसरो चंद्रयान-2 के साथ एहतियात बरत रहा है क्योंकि चंद्रयान-1 और मंगलयान मिशन के बाद चंद्रयान-2 इसरो के लिए एक बहुत बड़ा मिशन है। किसी भी खगोलीय पिंड पर उतरने का इसरो का यह पहला मिशन है।
अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, 'हम कोई भी जोखिम मोल नहीं लेना चाहते हैं।' उन्होंने बताया कि अब चंद्रयान-2 मिशन को जनवरी में रवाना किया जा सकता है। अप्रैल में इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने सरकार को अक्तबूर-नवंबर में होने वाले प्रक्षेपण को टालने की सूचना दी थी। चंद्रयान-2 की समीक्षा करने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की समिति ने इस मिशन से पहले कुछ अतिरिक्त परीक्षण की सिफारिश की थी। चंद्रयान-2 चांद पर रोवर उतारने की इसरो की पहली कोशिश है। यह चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। चांद के इस हिस्से की ज्याद जांच-पड़ताल अब तक नहीं हुई है।