दुनिया भर में बाल विवाह की गंभीर समस्या को लेकर भारत से एक अहम आवाज उठी है। बाल अधिकार कार्यकर्ता और विधिवेत्ता भुवन ऋभु ने संयुक्त राष्ट्र से मांग की है कि बाल विवाह के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए। उनका कहना है कि इससे दुनिया भर में इस अपराध के खिलाफ जागरूकता बढ़ेगी और सरकारों की जवाबदेही भी तय होगी। यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब बाल विवाह आज भी कई देशों में बड़ी सामाजिक चुनौती बना हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र के कमीशन ऑन द स्टैटस ऑफ वूमन के 70वें सत्र के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में भुवन ऋभु ने कहा कि दुनिया में आज भी हर तीन सेकेंड में एक बाल विवाह हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल सामाजिक समस्या नहीं है बल्कि बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। उनके अनुसार बाल विवाह बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण और हिंसा का एक रूप है, जिसे कई बार परंपरा या संस्कृति के नाम पर छिपा दिया जाता है।
बाल विवाह खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस क्यों जरूरी?
भुवन ऋभु ने कहा कि बाल विवाह को खत्म करने के लिए वैश्विक स्तर पर मजबूत जवाबदेही और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है। उनका कहना है कि अगर संयुक्त राष्ट्र बाल विवाह उन्मूलन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित करता है तो यह दुनिया भर के देशों के लिए एक मजबूत संदेश होगा। इससे सरकारों, समाज और संगठनों को मिलकर इस अपराध को खत्म करने के लिए काम करने की प्रेरणा मिलेगी।
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भारत ने बाल विवाह रोकने में क्या प्रगति की है?
कार्यक्रम में भुवन ऋभु ने भारत की प्रगति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने दिखाया है कि बाल विवाह को रोका जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में देश में बाल विवाह के मामलों में बड़ी कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार तीन साल से भी कम समय में भारत में बाल विवाह की दर 23 प्रतिशत से घटकर 15 प्रतिशत से नीचे आ गई है। उन्होंने कहा कि सरकार, समाज, समुदाय और धर्मगुरुओं की भागीदारी से यह बदलाव संभव हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय का इस प्रस्ताव पर क्या रुख है?
इस कार्यक्रम में कई देशों के प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के नेताओं ने भी भाग लिया और इस मांग का समर्थन किया। सिएरा लियोन की प्रथम महिला डॉ. फातिमा मादा बायो, नेपाल की महिला, बाल एवं वरिष्ठ नागरिक मंत्री श्रद्धा श्रेष्ठ सहित कई नेताओं ने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक स्तर पर मजबूत पहल की जरूरत है। उनका मानना है कि एक अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित होने से इस मुद्दे पर दुनिया का ध्यान और ज्यादा केंद्रित होगा।
बाल विवाह रोकने में सामाजिक संगठनों की क्या भूमिका है?
बाल अधिकारों के लिए काम करने वाला संगठन जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन इस अभियान में अहम भूमिका निभा रहा है। यह देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है जिसमें 250 से अधिक संगठन जुड़े हुए हैं। यह नेटवर्क भारत के 451 जिलों में बाल विवाह रोकने के लिए काम कर रहा है। इस नेटवर्क ने सरकारी एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर पिछले तीन वर्षों में करीब पांच लाख बाल विवाह रुकवाने में मदद की है।
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