भारत में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में वर्ष 2025 ऐतिहासिक साबित हुआ है। देश में पहली बार एक साल में 20,138 अंग प्रत्यारोपण किए गए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। वहीं, वर्ष 2023 में राष्ट्रीय डिजिटल अंगदान पोर्टल शुरू होने के बाद से अब तक आधार सत्यापित अंगदान की शपथ लेने वालों की संख्या 5 लाख से अधिक हो गई है। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सोमवार को 16वें भारतीय अंगदान दिवस के कार्यक्रम में दी। इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन ने किया।
दुनिया में तीसरे स्थान पर भारत
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण के कुल मामलों में भारत अब अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। वहीं, जीवित दाताओं से अंग प्रत्यारोपण के मामले में भारत अब भी दुनिया में पहले स्थान पर है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में देश में 4,990 अंग प्रत्यारोपण हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 20,138 तक पहुंच गई। इसी तरह मृत दाताओं से होने वाले प्रत्यारोपण की संख्या भी 837 से बढ़कर 3,526 हो गई है।
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जागरूकता अभियान और पीएम मोदी की अपील का असर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अंगदान के प्रति लोगों में बढ़ती जागरूकता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का सकारात्मक असर देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डिजिटल अंगदान पोर्टल शुरू होने के बाद 5 लाख से अधिक लोगों ने आधार सत्यापन के साथ अंगदान का संकल्प लिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि देश में अभी भी अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
'जुग-जुग जियो अभियान' और नई डिजिटल सेवाओं की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान अनुप्रिया पटेल ने अंगदान व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 'जुग-जुग जियो अभियान' की शुरुआत की। इसके साथ ही ई-प्रत्यारोपण डिजिटल प्लेटफॉर्म और एनओटीटीओ मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया गया। उन्होंने नेशनल ब्रेन स्टेम डेथ सर्टिफिकेशन गाइडलाइंस और स्वैप ट्रांसप्लांटेशन की राष्ट्रीय गाइडलाइंस भी जारी कीं। उनका कहना है कि इससे पूरे देश में अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, एक समान और प्रभावी बनेगी।
अंगदान को लेकर फैली गलतफहमियां दूर करने की जरूरत
अनुप्रिया पटेल ने कहा कि अंगदान को लेकर समाज में अब भी कई तरह की गलतफहमियां हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया का कोई भी प्रमुख धर्म अंगदान का विरोध नहीं करता। अंगदान एक मानवीय कार्य है, जो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने का अवसर देता है।
देशभर में मजबूत हो रहा अंगदान नेटवर्क
मंत्री ने बताया कि सरकार ने अंगदान और प्रत्यारोपण के लिए मजबूत संस्थागत नेटवर्क तैयार किया है। इसमें-
- राष्ट्रीय स्तर पर एनओटीटीओ
- पांच क्षेत्रीय संगठन (आरएनओटीटीओ)
- 26 राज्य स्तरीय संगठन (एसएनओटीटीओ)
- करीब 1,200 पंजीकृत अस्पताल शामिल हैं।
इन सभी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के लिए सरकार ने एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया है, जिससे अंगों के आवंटन और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।
मरीजों को आर्थिक सहायता भी मिल रही
अनुप्रिया पटेल ने बताया कि राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम (एनओटीपी) के तहत राज्यों को अस्पतालों का ढांचा मजबूत करने, अंगों की सुरक्षित निकासी, संरक्षण और परिवहन के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में किडनी ट्रांसप्लांट को हेल्थ बेनिफिट पैकेज में शामिल किया गया है। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को राष्ट्रीय आरोग्य निधि के तहत भी सहायता मिलती है। इसके अलावा, देशभर में 20,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के जरिए प्रत्यारोपण के बाद जरूरी दवाएं भी कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
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31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंचा नेटवर्क
स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि NOTTO-ROTTO-SOTTO नेटवर्क अब 31 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक फैल चुका है, जिससे अंगों की उपलब्धता और आवंटन में बेहतर समन्वय हो रहा है। उन्होंने बताया कि एम्स नई दिल्ली के अलावा 10 नए एम्स संस्थानों में किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू हो चुकी है। वहीं, एम्स जोधपुर, भुवनेश्वर, पटना और ऋषिकेश में लिवर ट्रांसप्लांट शुरू हो गया है, जबकि एम्स भोपाल में अब हार्ट ट्रांसप्लांट भी किया जा रहा है।