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हम अब भी हैं गुलाम नंबर वन

Tue, 31 May 2016 03:21 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : bbc
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देश को आजाद हुए 69 साल हो गए हैं लेकिन लोग अभी भी गुलाम हैं। एक ताजा सर्वे के मुताबिक भारत गुलामी के मामले में नंबर वन बना हुआ है। वैश्विक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक भारत में दुनिया के सबसे अधिक 18 लाख लोग बंधुआ मजदूर, जबरदस्ती बनाए गए भिखारी, सेक्स वर्कर, बाल मजदूर हैं। 
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यह खुलासा वॉक फ्री फाउंडेशन संस्था के ‘आधुनिक दासता’ को लेकर सोमवार को जारी ग्लोबल स्लैवरी इंडेक्स-2016 में हुआ है। 167 देशों के इस इंडेक्स में भारत टॉप पर है।फाउंडेशन के लिए यह सर्वे वैश्विक एजेंसी गैलप ने किया है। सर्वे 53 भाषाओं में 42 हजार लोगों के साक्षात्कार पर आधारित है। यह रेंडम सर्वे भारत के 15 राज्यों में किया गया।

रिपोर्ट में साफ किया गया है कि यहां दास को पारंपरिक दास नहीं समझना चाहिए जिन्हें कानूनी संपत्ति के रूप में बंधुआ रखा जाता था। बल्कि इन्हें ‘मॉडर्न स्लेवरी’ यानी आधुनिक दासता का नाम दिया गया है। 
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ऑस्ट्रेलिया वेस्ड फाउंडेशन के सह-संस्थापक ग्रेस फॉरेस्ट कहते हैं कि "इस रिसर्च से पता चलता है कि भारत में आधुनिक गुलामी सभी रूपों में मौजूद है। अंतर- पीढ़ीगत बंधुआ मजदूरी, जबरन बाल श्रम, कामर्शियल यौन शोषण सहित भीख मांगने के लिए भी मजबूर किया जाता है। 

जनसंख्या के लिहाज से देश में एक करोड़ 83 लाख 50 हजार से ज्यादा लोग आधुनिक दासता में फंसे हैं। यह देश की कुल आबादी का 1.4 फीसदी है। हालांकि प्रतिशत के हिसाब से उत्तर कोरिया सबसे आगे है। वहां की कुल आबादी के 4.37 फीसदी लोग आधुनिक दासता में फंसे हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे विश्व में 45.8 मिलियन लोग अधुनिक दासता के शिकार हैं, जिनमें 58 प्रतिशत लोग अकेले भारत, चीन, पाकिस्तान, बंग्लादेश और उजबेकिस्तान हैं। भारत से 1976 में ही बंधुआ मजदूरी को समाप्त कर दिया गया था।

लेकिन इन धंधों में शामिल लोग गांवों से गरीब लोगों को अच्छी नौकरी का लालच देकर शहर ले आते हैं और फिर उन्हें घरेलू काम, वेश्यावृत्ति, या ईंट भट्टों, कपड़ा इकाइयों और खेतों में काम के लिए झोंक देते हैं। 

सर्वे करने वाली फाउंडेशन ने केंद्र से अनुरोध किया है कि प्राइवेट एम्पलाई के लिए नीतियां बनाए। इस तरह के मुद्दों को बचपन बचाओ आन्दोलन चला रहे नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी कई बार उठाते रहे हैं। 
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