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2+2 Meeting: भारत और जापान के मंत्रियों की बैठक, यूनिकॉर्न और तकनीकी हस्तांतरण सहित इन मुद्दों पर हुई चर्चा

Wed, 21 Aug 2024 02:16 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

2+2 Meeting: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, जापान की विदेश मंत्री कामिकावा योको और रक्षा मंत्री किहारा मिनोर ने तीसरी टू प्लस टू बैठक में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर सहमति जताई।
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तीसरी 2+2 बैठक में भारत और जापान के रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री - फोटो : एएनआई/एक्स/डॉ. एस जयशंकर
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विस्तार
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भारत और जापान ने मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों, देशों को राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात पर जोर दिया। साथ ही, यूनिफाइड कॉम्पलैक्स रेडियो एंटीना (यूनिकॉर्न) और अन्य तकनीकों के हस्तांतरण में हुई प्रगति की सराहना की और जल्द ही इनसे जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर करने को लेकर चर्चा की। 
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दोनों पक्षों ने 2+2 बैठक में एक स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाने पर चर्चा की। उन्होंने इसे सभी के लिए समावेशी, शांतिपूर्ण, समृद्ध और मजबूत बनाने पर बात की और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने पर जोर दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, जापान की विदेश मंत्री कामिकावा योको और रक्षा मंत्री किहारा मिनोर ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों, राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर सहमति जताई। उन्होंने विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और बल प्रयोग या धमकी से बचने की जरूरत पर जोर दिया। 

उन्होंने आतंकवाद और चरमपंथी हिंसा के सभी रूपों की निंदा की, जिसमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है। उन्होंने 26/11 मुंबई, पठानकोट और अन्य हमलों के दोषियों को भी सजा दिलाने का आह्वान किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की सूची में शामिल आतंकवादी संगठनों जैसे अल-कायदा, आईएसआईएस, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके प्रॉक्सी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जरूरत पर भी जोर दिया। 
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मंत्रियों ने आसियान की एकता और केंद्रीयता के प्रति भी अपना मजबूत समर्थन दोहराया और 'आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक' (एओआईपी) को पूरी तरह से समर्थन देने की बात की। इस दृष्टिकोण में हिंद प्रशांत क्षेत्र में खुलापन, पारदर्शिता, समावेशिता और नियम आधारित ढांचा और आंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान शामिल है। उन्होंने क्वाड में सहयोग को लेकर भी एक दूसरे देश की सराहना की और 29 जुलाई को टोक्यो में हुई क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के आधार पर इसका विस्तार करने की प्रतिबद्धता दोहराई। 
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