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अवॉर्ड: तिनका-तिनका इंडिया राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए नामांकन आमंत्रित, इस बार का विषय 'जेल में टेलीफोन'

Sat, 06 Nov 2021 09:57 AM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वर्तिका नंदा देश की जानी-मानी जेल सुधारक हैं। उनकी स्थापित तिनका-तिनका फाउंडेशन को बंदियों के लिए देश के पहले खास सम्मानों तिनका-तिनका इंडिया अवॉर्ड और तिनका-तिनका बंदिनी अवॉर्ड की शुरुआत करने का श्रेय जाता है।
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2019 के तिनका-तिनका पुरस्कार समारोह की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जेलों की बेहतरी के लिए काम करने वाली देश की जानी-मानी संस्था तिनका-तिनका फाउंडेशन ने वर्ष 2021 के लिए तिनका-तिनका इंडिया अवॉर्ड की प्रविष्टियां आमंत्रित कर दी हैं। तिनका-तिनका इंडिया अवॉर्ड जेलों में बंद कैदियों और जेल अधिकारियों के लिए देश के पहले और इकलौते अवॉर्ड हैं। इनका मकसद जेलों में सुधार और सृजनात्मकता को बढ़ावा देना है। इस साल का विषय 'जेल में टेलीफोन' रखा गया है, जिन्हें तीन वर्गों पेंटिंग, विशेष प्रतिभा और जेल अधिकारी में बांटा गया है।  आवेदन भेजने की अंतिम तारीख 12 नवंबर है। 

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जल्द होगा विजेता जेल के नाम का एलान
गौरतलब है कि ये पुरस्कार हर साल देश की किसी जेल में रिलीज किए जाते हैं। वर्तिका नंदा के मुताबिक, तिनका-तिनका इंडिया अवॉर्ड 2021 के लिए जेल के नाम की घोषणा जल्द की जाएगी। 2020 में इन पुरस्कारों के लिए 'कोरोना के दौर में जेल' थीम रखी गई थी। उस दौरान हरियाणा जेल और पुलिस महानिदेशक के सेल्वाराज और पूर्व पुलिस महानिदेशक दिल्ली जेल अजय कश्यप ने पुरस्कार वितरित किए थे। जेलों के लिए दिए जाने वाले इन पुरस्कारों की वजह से बंदियों के जीवन में कई बड़े बदलाव हुए हैं। 

वर्तिका नंदा ने की थी इस फाउंडेशन की शुरुआत
जानकारी के मुताबिक, वर्तिका नंदा देश की जानी-मानी जेल सुधारक हैं। उनकी स्थापित तिनका-तिनका फाउंडेशन को बंदियों के लिए देश के पहले खास सम्मानों तिनका-तिनका इंडिया अवॉर्ड और तिनका-तिनका बंदिनी अवॉर्ड की शुरुआत करने का श्रेय जाता है। ये पुरस्कार हर साल राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस और महिला दिवस पर जेलों में सृजन कर रहे बंदियों को दिए जाते हैं। तिनका-तिनका श्रृंखला के तहत तिनका-तिनका तिहाड़, तिनका-तिनका डासना और तिनका-तिनका मध्य प्रदेश किताबें काफी चर्चित रही हैं। वर्तिका नंदा दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज में पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष हैं और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अपराध बीट की प्रमुख पत्रकार रही हैं। उनके कामों को दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्डस में शामिल किया जा चुका है। भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें 2014 में स्त्रीक शक्ति पुरस्कार दिया था।

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