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भारत दुनिया में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विकास दर की तेजी कुछ सालों तक रहेगी बरकरार: वित्तमंत्री

Mon, 18 Jun 2018 06:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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अरुण जेटली
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि बीते वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में अर्थव्यवस्था में हुई शानदार 7.7 फीसदी की तेज विकास दर ने भारत को दुनियाभर में तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित कर दिया है। विशेषज्ञों की माने तो अर्थव्यवस्था में तेजी का यह दौर अगले कुछ वर्षों तक जारी रहेगा। 
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किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के बाद स्वास्थ्य लाभ कर रहे जेटली ने सोमवार को सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से विकास कर रही है और दुनिया इसका लोहा मान रही है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान देश में नोटबंदी हुई, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को लागू किया गया और इनसोलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) को अमल में लाया गया। उनका संकेत है कि अर्थव्यवस्था ने दो चुनौतीपूर्ण तिमाहियों को देखा लेकिन इसका विकास दर पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं हुआ। उन्होंने लिखा कि अर्थव्यवस्था की विकास दर में दो फीसदी तक की गिरावट की भविष्यवाणी करने वाले गलत साबित हुए हैं।

रोजगार के अवसर बढ़े

रोजगार सृजन की चर्चा करते हुए जेटली ने लिखा है कि इस समय कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में दो अंकों की विकास दर दिख रही है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें काफी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। अभी देखें तो अर्थव्यवस्था में निवेश बढ़ रहा है। घरेलू निवेश भी बढ़ा है जबकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रवाह में तो अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। आईबीसी के लागू होने से बैंकों का जो फंसा कर्ज था, उससे संबंधित मामले सुलझ रहे हैं। इन सब कदमों से मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में भी विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही सरकार की तरफ से भी ढांचागत संरचना के विस्तार में काफी राशि का निवेश किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में तो ढांचगत संरचना के विकास पर काफी ध्यान दिया जा रहा है।
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प्रत्यक्ष कर वसूली में हुई है बढ़ोतरी

वित्त मंत्री ने लिखा है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान ऐसे कदम उठाये गए हैं, जिससे प्रत्यक्ष कर वसूली में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। नोटबंदी, जीएसटी, डिजिटलीकरण, पैन और आधार संख्या का समायोजन (लिंकिंग) जैसे कदमों से काले धन पर लगाम लगा है। विदेशी काला धन कानून, बेनामी संपत्ति निषेध कानून, आय घोषणा योजना, सिंगापुर एवं मॉरीशस के साथ कर समझौतों में बदलाव जैसे कदमों से प्रत्यक्ष कर वसूली में तेज बढ़ोतरी हुई। नोटबंदी के बाद आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यहां तक कि कॉरपोरेट रिटर्न भरने वालों की संख्या में भी 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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