अभी क्या कर रहा है भारत
1. भारत ने कूटनीतिक, राजनीतिक नेतृत्व के स्तर और सुरक्षा बलों के स्तर पर जवाब देने की योजना बनाई है। प्रधानमंत्री ने खुद कहा है कि उन्होंने सुरक्षा बलों को खुली छूट दे दी है। सुरक्षा बल समय और स्थान तय करके पुलवामा में आतंकी हमले का करारा जवाब देंगे। इस पर मेजर जनरल (पूर्व)लखविंदर सिंह का कहना है कि ऐसा कुछ भी बिना मजबूत और स्पष्ट राजनीतिक इच्छा शक्ति के संभव नहीं है। हालांकि रक्षा मामलों के विशेषज्ञ जंग जैसे हालात के पक्ष में नहीं हैं।
2. कूटनीति के स्तर पर भारत ने पाकिस्तान के भारत में उच्चायुक्त सोहेल मोहम्मद को तलब करके उन्हें अपनी कड़ी प्रतिक्रिया से अवगत कराया। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पाकिस्तान में स्थित भारत के उच्चायुक्त के जरिए भी कूटनीतिक दबाव बनाया है।
3. हंगरी, इटली, जर्मनी समेत तमाम देश के राजदूतों को विदेश मंत्रालय ने आमंत्रित करके उन्हें पाकिस्तान से प्रायोजित आतंकवाद, आतंकवाद को सह के बारे में जानकारी दी है। अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन समेत दुनिया के तमाम देशों ने पुलवामा में आतंकी हमले की तीव्र भत्र्सना की है। भारत से जी-फाईव (अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान) से हमले और पाकिस्तान की जमीन से चलने वाले आतंकी संगठनों के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया जताई है।
4. शनिवार 16 जनवरी को आसियान देशों के राजनयिकों के सामने भी विदेश मंत्रालय पाकिस्तान की करतूत उजागर करेगा। इसके अलावा भारत कूटनीतिक तरीके से इस मामले को 17-22 फरवरी के बीच में फाइनेंशियल एक्शन ड्राफ्ट की बैठक में उठाने की तैयारी है। ताकि पाकिस्तान को दुनिया से मिल रही आर्थिक मदद को रोका जा सके।
5. पाकिस्तान को कूटनीतिक तरीके से अलग-थलग करने का प्रयास, लेकिन यह लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया है। वैसे भी देश में आम चुनाव भी कुछ महीने ही दूर है।
कब काम करता है पूरा दबाव
कूटनीतिक जानकारों और सैन्य विशेषज्ञों(ले. जन. सतीश दुआ, मेजर जन, लखविंदर सिंह, ले. जन. बलबीर सिंह संधू) के अनुसार देश के राजनीतिक नेतृत्व, पाकिस्तान के साथ संबंध, सैन्य डिप्लोमेसी, कूटनीतिक रिश्ते और अंतराष्ट्रीय दबाव में संतुलन के बाद दबाव और कार्रवाई की अच्छी स्थिति बनती है। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के विरुद्ध कार्रवाई, सीमा, नियंत्रण रेखा पर शांति, पाकिस्तान के साथ शांति बनाए रखने के प्रयास और पाकिस्तान पर आतंकवाद के विरुद्ध प्रभावी अंतरराष्ट्रीय दबाव के जरिए ही इसका कारगर समाधान निकल सकता है।
मेजर जनरल लखविंदर सिंह का मानना है कि पर कारगिल युद्ध, संसद पर हमला होने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने आपरेशन पराक्रम का आदेश दिया, लेकिन पाकिस्तान के साथ कभी संवाद की स्थिति बंद नहीं की। यही वजह थी कि दबाव बनाने में सफल रहे थे। संघर्ष विराम समझौते तक भारत-पाकिस्तान आ सके थे।