शरीर में आयोडीन की कमी से होने वाले घेंघा रोग के खिलाफ साल 1962 में पहली बार सरकार ने राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया था। लेकिन 57 सालों बाद भी केवल 5 ऐसे राज्य हैं, जहां करीब सौ फीसदी लोग आयोडीन की कमी से दूर हो पाए हैं।
पहली बार कराए गए राज्यवार अध्ययन में आयोडीन की कमी से मुक्त हुए राज्य हैं जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड। जबकि सबसे कम आयोडीन नमक का इस्तेमाल ओडिशा, आंध्र प्रदेश, पांडिचेरी, राजस्थान और तमिलनाडु के घरों में हो रहा है। यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में आज भी क्रिस्टल नमक का ही ज्यादा इस्तेमाल होता है, जिसमें आयोडीन नहीं होता।
इंडिया आयोडीन सर्वे 2018-19 के अनुसार देश के 76.3 फीसदी घरों में ही आयोडीन युक्त नमक पहुंच रहा है। सरकार ने 2022 तक देश के करीब 90 फीसदी घरों में आयोडीन नमक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। गंभीर स्थिति वाले राज्यों में राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत कार्यक्रम किए जाएंगे। चीन जैसे कई देशों में सौ फीसदी आयोडीन नमक का ही इस्तेमाल होता है।
उत्तर भारत में आयोडीन नमक की खपत
राज्य घर (फीसदी में)
जम्मू-कश्मीर 99.8
चंडीगढ़ 96.5
दिल्ली 87.3
हरियाणा 86.7
पंजाब 85.1
उत्तराखंड 84.1
हिमाचल प्रदेश 73.9
उत्तर प्रदेश 72.3
बिहार 72.9
राजस्थान 65.7
जरूरी फैक्ट
. प्रति व्यक्ति रोजाना 500 माइक्रोग्राम तक आयोडीन लेने की जरूरत
. 15 से 49 वर्ष की आयु के बीच महिलाओं को आयोडीन की खास जरूरत
. 80 लाख नवजात शिशु हर वर्ष आयोडीन की कमी के साथ ले रहे जन्म
. 5 वर्ष तक के 3 करोड़ से ज्यादा बच्चों में आयोडीन की कमी
पाकिस्तान से आने वाले सेंधा नमक में आयोडीन नहीं
सेंधा या काला नमक को लेकर भारत में भ्रांतियां हैं। पाकिस्तान से आने वाले सेंधा नमक में आयोडीन नहीं होता है। इस नमक का सेवन केवल चिकित्सीय परामर्श पर ही करना चाहिए। आमतौर पर लोग पूरे परिवार को रोजाना सेंधा नमक देते हैं। - डॉ. चंद्रकांत एस पांडव, पूर्व विभागाध्यक्ष, सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन एम्स