एक साल पहले चेन्नई में आयोजित तीसरे इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ) में एक हजार से अधिक छात्रों ने टीचर से पपीते के डीएनए को अलग करने का तरीका सीखा। गिनीज बुक में इसे एक रिकॉर्ड की तरह दर्ज किया गया। अब उसी तरीके से करीब 600 छात्र लखनऊ में आयोजित चौथे आईआईएसएफ में पपीते से डीएनए अलग करने का प्रयोग करके नया गिनीज रिकॉर्ड बनाने का प्रयास करेंगे।
बीते तीन फेस्टिवल में गिनीज रिकॉर्ड के तीन प्रयास किए, जिनमें से दो रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज कर लिए गए। लखनऊ में पपीते का डीएनए अलग करने के प्रयोग के अलावा दो हजार से अधिक छात्रों को फर्स्ट एड की ट्रेनिंग देकर एक अलग रिकॉर्ड बनाने का प्रयास होगा।
चौथे आईआईएसएफ का लखनऊ में शुक्रवार से आयोजन हो रहा है। चार दिवसीय फेस्टिवल में शनिवार शाम राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद भी शिरकत करेंगे। फेस्टिवल का मुख्य आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा।
विज्ञान को जन आंदोलन बनाना उद्देश्य : डॉ. हर्षवर्धन
इस साइंस फेस्टिवल की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार विज्ञान को प्रयोगशाला से निकालकर आमलोगों के बीच ले जा रही है। और उसका उद्देश्य विज्ञान को जन आंदोलन बनाना है।
इस बार फेस्टिवल में 5 लाख से ज्यादा लोगों के पहुंचने की उम्मीद की जा रही है। इसमें साइंस विलेज, नवभारत निर्माण, साइंस एक्सपो, विदेश में काम करने वाले भारतीय मूल के विज्ञानियों का सम्मेलन, देशभर के विभिन्न प्रदेशों के विज्ञान मंत्रियों का सम्मेलन, महिला विज्ञानियों का सम्मेलन समेत 23 किस्म के कार्यक्रम होंगे।