भारत ईरान के संपर्क में है, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय झंडे वाले करीब 28 व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। अमेरिका और इस्राइल के साथ जंग तेज होने के बाद ईरान ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को आंशिक रूप से बंद कर दिया है। इस मामले से जुड़े लोगों ने गुरुवार को यह जानकारी दी।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष के बीच बातचीत हुई, जिसमें जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। जानकारी मिली है कि पिछले चार-पांच दिनों से ईरान ने किसी भी भारतीय झंडे वाले व्यावसायिक टैंकर को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी है।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस समय भारतीय झंडे वाले 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक हैं। वहीं, चार जहाज, इस अहम समुद्री मार्ग के पूर्वी हिस्से में तैनात हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हाल के दिनों में भारत के विदेश मंत्री और ईरान के विदेश मंत्री के बीच तीन बार बातचीत हुई है। उन्होंने कहा कि जहाजों की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी। लेकिन इसके आगे कुछ कहना अभी जल्दबाजी होगा।
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होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है दुनिया के 20 फीसदी तेल की आवाजाही
ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य आंशिक रूप से बंद होने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित है और दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल और तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आवाजाही इसी मार्ग से होती है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान ने भारतीय झंडे वाले दो जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है, तो जायसवाल ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और इस सवाल का बेहतर जवाब पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय दे सकता है।
ईरान में रह रहे 9000 भारतीय
जायसवाल ने बताया कि इस समय लगभग 9,000 भारतीय ईरान में रह रहे हैं। भारत सरकार उन लोगों की मदद कर रही है, जो अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते भारत लौटना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इन 9,000 भारतीयों में छात्र, नाविक, कुछ कारोबारी, कुछ पेशेवर लोग और कुछ तीर्थयात्री शामिल हैं। भारत पहले ही कई भारतीय नागरिकों को तेहरान से ईरान के अन्य सुरक्षित शहरों और स्थानों पर स्थानांतरित कर चुका है, जिनमें छात्र और तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
जायसवाल ने कहा कि जो भारतीय नागरिक अजरबैजान और आर्मेनिया के रास्ते यात्रा करना चाहते हैं, उन्हें वहां से वाणिज्यिक उड़ानों के जरिये भारत लौटने में मदद की जा रही है। इसके लिए उन्हें वीजा और जमीनी सीमा पार करने में भी सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कई भारतीय नागरिकों ने सरकार से संपर्क किया है और उन्हें अजरबैजान और आर्मेनिया की सीमा पार करने में मदद दी गई है, जहां से वे वाणिज्यिक उड़ानों के जरिये अपने घर लौट रहे हैं।