डिजिटलीकरण के साथ-साथ साइबर खतरों का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन सुरक्षा तोड़ने के मामले में भारत चौथे स्थान पर है। यह बात एक सिमेंटेक के अध्ययन में सामने आई है। अध्ययन में कहा गया है कि दुनिया भर में जितने ऐसे मामले सामने आते हैं उनमें भारत 5% से अधिक वैश्विक साइबर खतरे के लिए जिम्मेदार है।
ऑनलाइन सुरक्षा तोड़ने की सूची में अमेरिका और चीन का पहले और दूसरे स्थान पर कब्जा है। ये दोनों देश 34% से अधिक वैश्विक साइबर खतरे के लिए जिम्मेदार हैं। इसके बाद इस सूची में तीसरा नंबर ब्राजील का आता है।
अध्ययन में कहा गया है कि साल 2016 में हैकरों ने ई-मेल को हैकिंग करने का एक जरिया बनाया है। इसके बाद रैनसोवेयर और आईओटी जैसे नए क्षेत्र खतरे के बादल के रूप में उबरते हुए देखे गए हैं, जबकि 2015 में चीन में लगभग 24% हैकिंग के मामले थे, जिसे 2016 में चीन 10% से नीचे लाने में कामयाब रहा है। वहीं 2015 में भारत में साइबर धोखाधड़ी के मामले 3.4% थे, जो 2016 में बढ़कर 5.1% हो गए।
सिमेंटेक के समाधान उत्पाद प्रबंधन निदेशक तरुन कौर ने यह खुलासा किया कि बांग्लादेश, वियतनाम, इक्वाडोर और पोलैंड की बैंकों पर हमले में ऐसे सबूत सामने आए हैं जो उत्तर कोरिया को इससे जोड़ते हैं। उन्होंने बताया कि हमलवारों ने कम से कम 94 मिलियन डॉलर चुराए हैं। आपको बता दें कि सितंबर में कंपनी ने कहा था कि 2016 में 500 मिलियन यूजर के खातों से छेड़छाड़ के बाद याहू के अधिकतम धोखाधड़ी के मामले पकड़ लिए गए, लेकिन कुछ महीनों के भीतर कंपनी ने धक्का दिया और बताया कि एक बिलियन से ज्यादा यूजर के खातों से छेड़छाड़ हुई है। यदि हम डिजिटल अर्थव्यवस्था विकसित करना चाहते हैं, तो इसमें साइबर सुरक्षा का मामला सबसे पहले आता है।