नेपाल में आई भीषण आपदा के बाद भारत अब तक वायुसेना की तीन उड़ानों के जरिए कुल 57.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। शुक्रवार को तीसरी उड़ान के जरिए 10 टन राहत सामग्री के साथ 11 सदस्यीय मेडिकल/रेस्क्यू एसेसमेंट टीम भी भेजी गई। इससे पहले गुरुवार को भी वायुसेना के सी-17 परिवहन विमान ने 37.5 टन मानवीय सहायता सामग्री के साथ उड़ान भरी थी। इस खेप में 28.5 टन राहत सामग्री, 8 टन दवाएं और 1 टन खाद्य सामग्री शामिल थी। राहत सामग्री में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, पानी निकालने वाले पंप, किचन सेट और जनरेटर सेट जैसी जरूरी चीजें शामिल थीं। बुधवार को भी वायुसेना के सी-130जे विमान के जरिए 10 टन राहत एवं चिकित्सा सामग्री नेपाल भेजी गई थी।
संकट में संबल बना भारत
पिछले लगभग एक दशक में भारत संकट के समय सबसे पहले पहुंचने वाले देश के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। सरकार द्वारा चलाए गए कुछ बड़े अभियानों में इसकी बानगी साफ दिखाई देती है। एक विकासशील देश होने के बावजूद मानवीय सहायता के मामले में भारत का रिकॉर्ड अनेक बड़े देशों से बेहतर है। आपदा प्रबंधन में अब देश की गिनती सबसे पहले मदद करने वाले यानी फर्स्ट रेस्पॉन्डर देशों में होती है। पिछले लगभग एक दशक के आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि भारत हर बार संकट में संबल बना है। आइए नज़र डालते हैं-
ऑपरेशन अमिस्ताद (2026): भूकंप से तबाह वेनेजुएला में भारत ने वायुसेना के दो सी-17 विमानों से 41 सदस्यीय चिकित्सा टीम, करीब 30 टन राहत सामग्री, छह टन दवाएं व चिकित्सा उपकरण और दो पोर्टेबल भीष्म क्यूब अस्पताल भेजे।
ऑपरेशन ब्रह्मा (2025): म्यांमार में आए भूकंप के दौरान भी भारत ने सैन्य परिवहन क्षमता का इस्तेमाल कर राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता पहुंचाई। वायुसेना के विमानों के जरिए दवाइयां, टेंट, सूखा राशन और बचाव दल म्यांमार भेजे गए। साथ ही नौसेना के जहाजों ने भी राहत सामग्री पहुंचाई, जिससे राहत कार्यों को समय रहते गति मिल सकी।
ऑपरेशन दोस्त (2023): भारत और तुर्किये के रणनीतिक रिश्ते भले ही अलग रहे हों, लेकिन विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने खोजबीन व बचाव विशेषज्ञों एवं चिकित्सा दलों के साथ तुरंत मदद भेजी। यहां सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल ने मलबे के बीच रहकर चौबीसों घंटे घायलों का इलाज किया।
ऑपरेशन संजीवनी (2020): कोविड-19 महामारी के दौरान मालदीव में आवश्यक दवाइयों का गंभीर संकट पैदा हो गया था। भारत ने ऑपरेशन संजीवनी के तहत वायुसेना के विशेष विमान से 6 टन से अधिक आवश्यक दवाइयां और चिकित्सा सामग्री पहुंचाई और संकट की घड़ी में भरोसेमंद साझेदार की अपनी भूमिका मजबूत की।
ये भी पढ़ें:
इसरो का सैटेलाइट अध्ययन: हिमालय में 676 ग्लेशियर झीलें बढ़ीं 130 भारत में, खतरा यहां भी कम नहीं
ऑपरेशन मैत्री (2015): नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारतीय सेना, वायुसेना और एनडीआरएफ की टीमें तुरंत राहत और बचाव के लिए पहुंची थीं। सेना और एनडीआरएफ ने मलबे से हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला। भारत ने टनों खाद्य और चिकित्सा सामग्री पहुंचाने के अलावा प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा दोबारा खड़ा करने में भी भूमिका निभाई।
कूटनीति और सॉफ्ट पावर
इसके अलावा साल 2005 के पाकिस्तान भूकंप के बाद भारत ने राहत सामग्री भेजने के साथ 2.5 करोड़ डॉलर की सहायता का वादा किया। वहीं 2010 की विनाशकारी बाढ़ के दौरान भी भारत ने कुल 2.5 करोड़ डॉलर की सहायता उपलब्ध कराई और दिखा दिया कि मानवीय सहायता आपसी मतभेदों से बढ़कर है। यह सहायता देश की सॉफ्ट पावर का एक मजबूत हिस्सा बन चुकी है। कोरोना महामारी के दौरान टीकों की आपूर्ति हो, श्रीलंका का आर्थिक संकट हो या युद्धग्रस्त इलाकों से नागरिकों की सुरक्षित निकासी, भारत ने हर बार अपनी क्षमताओं का उपयोग संकट में फंसे लोगों की मदद के लिए किया है।