श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर असम के जोरहाट में गुरुवार को विश्व संस्कृत दिवस उत्साह और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाया गया। संस्कृत भारती की जोरहाट जिला शाखा की ओर से मधुकर भवन में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षाविदों, संस्कृत के अध्यापकों, विद्यार्थियों और भाषा प्रेमियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में संस्कृत भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के साथ इसे जोरहाट जिले के गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम का संचालन संस्कृत भारती की जोरहाट जिला शाखा के संयोजक जयंत शास्त्री ने किया। शुरुआत ध्येय मंत्र के सामूहिक पाठ से हुई। इसके बाद संस्कृत गीत, श्लोक पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से संस्कृत की समृद्ध परंपरा को याद किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया।
संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की आधारशिला
कार्यक्रम में गड़मूर शंकरदेव शिशु निकेतन की प्रधानाचार्या वर्णाली बरुआ, संस्कृत प्रेमी अच्युत बरुआ, जोरहाट इंजीनियरिंग कॉलेज की पूर्व प्राध्यापिका डॉ. नित्यान्जलि भट्टाचार्य, जगन्नाथ बरुआ विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका डॉ. स्वप्ना बरुआ और आउनीआटी विश्वविद्यालय के प्राध्यापक रूपम शास्त्री सहित कई शिक्षाविदों ने संस्कृत के महत्व पर विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि संस्कृत को केवल प्राचीन भाषा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें भारत की ज्ञान परंपरा, दर्शन, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत का विशाल संसार समाहित है। संस्कृत के अध्ययन और प्रचार से नई पीढ़ी को भारतीय सभ्यता की जड़ों से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
देवीचरण बरुआ बालिका महाविद्यालय के संस्कृत विभाग की प्राध्यापिका डॉ. मधुस्मिता डेका, जोरहाट नगर के कार्यवाह प्राणदीप शर्मा, संस्कृत भारती के उत्तर असम प्रांत के महाविद्यालय कार्य प्रमुख अनिर्वाण शर्मा और विश्व हिंदू परिषद के जोरहाट जिला सचिव राजू बरुआ ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
गांवों तक पहुंचेगी संस्कृत
कार्यक्रम में विकास बरठाकुर, पुलकेश बरुआ, भास्कर बरुआ, वर्षा बरुआ, डिंपी गायन सहित बड़ी संख्या में संस्कृत प्रेमी शामिल हुए। सभी ने जोरहाट जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
श्रावणी पूर्णिमा पर मनाया जाता है विश्व संस्कृत दिवस
श्रावणी पूर्णिमा के दिन देशभर में विश्व संस्कृत दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य संस्कृत भाषा की समृद्ध विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाना और नई पीढ़ी को इस प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ना है। जोरहाट में कार्यक्रम का समापन सामूहिक कल्याण मंत्र के पाठ के साथ हुआ।