भारत ने चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरने के बाद क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान के पहले भाषण पर सकारात्मकता प्रतिक्रिया दी है। शनिवार को भारत ने उम्मीद जताई कि पाकिस्तान की नई सरकार एक सुरक्षित, स्थिर, मजबूत और विकसित दक्षिण एशिया को आतंक और हिंसा से मुक्त बनाने के लिए रचनात्मक रूप से काम करेगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इस बात का स्वागत किया कि पाकिस्तान के लोगों ने आम चुनावों के जरिए लोकतंत्र पर अपना विश्वास जताया है। यह बात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के कुछ लोगों का मानना है कि इमरान खान जोकि पाकिस्तान में सरकार बनाने वाले हैं, वह पाकिस्तानी सेना की कठपुतली हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना ने उनके पक्ष में मतदान करवाने के लिए हेरफेर किया है।
कुमार ने कहा, 'भारत अपने पड़ोसियों के साथ शांति के साथ ही समृद्ध और प्रगतिशील पाकिस्तान चाहता है।'खान ने नई दिल्ली का जिक्र करते हुए कहा था कि यदि भारत पाकिस्तान के साथ शांति के लिए एक कदम बढ़ाएगा तो वह दो कदम बढ़ाने के लिए तैयार हैं। भारत में मौजूद पाकिस्तान के उच्चायोग सोहेल मपहमूद ने कहा कि खान की जात दोनों देशों के लिए अपने रिश्ते सुधारने का मौका है।
महमूद ने कहा कि यह ऐसा समय है जब द्वीपक्षीय संबंधों में पुरानी बातों को भुला दिया जाए। भारत पाकिस्तानी सेना की मंशा को लेकर अनिश्चित है और उसे यह भी नहीं पता कि खान सरकार का आतंक पर क्या रवैया होगा जोकि भारत की चिंता का सबसे बड़ा सबब है।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए खान की तहरीक-ए-इंसाफ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। एक सूत्र ने कहा, 'हमारा काम किसी का पक्ष लेने का नहीं है। हम पाकिस्तान के लोगों के फैसले की इज्जत करते हैं। यह सच है कि इमरान खान को लोगों का समर्थन मिला है।'