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भारत की दो टूक, चीन के कब्जे वाले तिब्बत पर नहीं बदली है अपनी पॉलिसी

Fri, 14 Apr 2017 05:28 PM IST
amarujala.com, Presented By : अनंत पालीवाल
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भारत ने शुक्रवार को साफ किया कि चीन के कब्जे वाले तिब्बत पर उसकी पॉलिसी में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं आया है। भारत की यह प्रतिक्रिया उस बात पर आई है, जिसमें कहा गया कि चीन दलाई लामा के अरुणाचल दौरे से नाखुश है और इसका सीमा विवाद पर नकरात्मक प्रभाव पड़ेगा। 
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चीन ने आरोप लगाया कि भारत ने तिब्बत मुद्दे पर अपनी प्रतिबद्धता का उल्लंघन किया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि बीजिंग अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की सुरक्षा के लिए ‘आगे कदम’ उठाएगा।

चीन ने दलाई लामा और अरुणाचल के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के उस बयान की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि राज्य की सीमा चीन नहीं सिर्फ तिब्बत के साथ जुड़ी है। दलाई लामा की 4 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा के बाद से चीन ने अब तक का सबसे कड़ा बयान दिया है।
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चीनी अखबार ने किया था ये दावा

चीन के एक अखबार ने दावा किया था कि भारत के शासन से अरुणाचल के लोग खुश नहीं हैं। प्रदेश के निवासी फिर से चीन में वापस लौटना चाहते हैं। चीन के सरकारी अखबार चाइना डेली ने कहा था कि दलाई लामा के दौरे से वहां के लोग खुश नहीं है और इसे वहां के स्थानीय निवासियों ने भारत की तरफ से किया गया एक धोखा करार किया है। 

उत्तराधिकारी का फैसला अनुयायी करेंगे 

बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा है कि उनके उत्तराधिकार का फैसला उनके अनुयायी करेंगे। उन्होंने कहा कि चीन को इसका हक नहीं है और चीन के इस प्रयास की उन्होंने कड़ी आलोचना की। बौद्ध धर्म गुरु ने शनिवार को यहां एक जनसभा में उनकी यात्रा को लेकर झूठी सूचना फैलाने के लिए चीन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बीजिंग के लिए उनकी आध्यात्मिक यात्रा को राजनीतिक रंग देना सामान्य बात है। दलाई लामा के अरुणाचल दौरे को लेकर चीन अपनी नाराजगी जताता रहा है।

तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा कि चीन के लोगों को उनके (दलाई लामा) बारे में गलत जानकारी दी जा रही है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि उन्हें ऐसा उस वक्त महसूस हुआ जब वह अन्य देशों में चीनी नागरिकों से मिले।

जब उनसे पूछा गया कि उनके तवांग, जिसे चीन अपना बताता है, के दौरे से भारत-चीन के रिश्तों पर असर पड़ेगा। इस पर उन्होंने कहा कि हमें इंतजार करना चाहिए। चीन के लिए मेरी आध्यात्मिक यात्रा को राजनीतिक रंग देना बेहद आम बात है। मेरी इच्छा है कि चीनी अधिकारी भी इस यात्रा में मेरे साथ होते और देखते कि क्या मैंने उनके खिलाफ कुछ भी बोला है?
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