भारतीय वैज्ञानिकों की वजह से देश को बड़ी सफलता हासिल हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने बताया कि एक ही साल में वैज्ञानिकों ने सिकलसेल बीमारी की जांच के लिए छह नई तकनीकों की खोज की है। इसके चलते भारत के पास सिकलसेल जांच की आठ अलग-अलग किट मौजूद हैं जो दुनिया के अन्य किसी भी देश के पास नहीं है।
आईसीएमआर के अनुसार, पीएम मोदी की सरकार ने राष्ट्रीय सिकलसेल एनीमिया मुक्ति मिशन शुरू हुआ है, जिसके तहत वैज्ञानिकों को करोड़ों लोगों की जांच के लिए स्वदेशी तरीके खोजने का मौका दिया गया। साल में दिल्ली एम्स और आईसीएमआर के अलग-अलग क्षेत्रीय संस्थानों ने मिलकर छह नई तकनीकों को खोज निकाला। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत का कहना है कि इन्हीं तकनीकों की मदद से देश में सात करोड़ लोगों की मुफ्त जांच की जाएगी।
एक हजार से ज्यादा मरीजों पर हुआ परीक्षण
रिपोर्ट में आईसीएमआर ने कहा है कि छह तकनीकों को करीब एक हजार से ज्यादा लोगों पर परीक्षण भी किया गया, जिनमें सबसे ज्यादा असरदार चंद्रपुर स्थित आईसीएमआर का हीमोग्लोबिनपैथी अनुसंधान, प्रबंधन और नियंत्रण केंद्र का शोध है, जिसे वॉक्सप्रेस रैपिड किट नाम दिया है। 70 मरीजों पर जांच में यह 100 फीसदी प्रभावी मिली है। इसी संस्थान ने मेरी स्क्रीन और एल्पाइन सिकल स्क्रीन रैपिड टेस्ट को तैयार किया है जो क्रमश: 100 और 99.04 फीसदी प्रभावी हैं। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने नागपुर एम्स के साथ मिलकर सिकल स्कैन कार्ड तैयार किया है, जिसे विदर्भ के 404 सिकलसेल रोगी और संदिग्धों की जांच में 92.04 फीसदी तक प्रभावी माना है।
17 राज्य के 278 जिलों में शुरू हुई जांच
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया मुक्ति मिशन के तहत देश के 278 जिलों में 0-40 वर्ष के लोगों की जांच शुरू की है। इसे और अधिक गति प्रदान करने के लिए आईसीएमआर की सभी स्वदेशी तकनीकों को अपनाया जाएगा। निजी क्षेत्र के सहयोग से इन किट्स का उत्पादन किया जा रहा है।
2047 तक खात्मे का लक्ष्य
गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, असम, यूपी, केरल, बिहार व उत्तराखंड को सिकलसेल बेल्ट माना जाता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 2047 तक इस रोग के प्रसार को खत्म करना है।
अन्य रोगों के खात्मे पर भी ध्यान
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा, हमारे पास अपार क्षमताएं हैं, जिनकी झलक पहले कोरोना और अब सिकलसेल के माध्यम से पूरी दुनिया देख रही है। आगामी दिनों में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक रोगों को लेकर भी आत्मनिर्भर भारत की क्षमता उजागर होगी।