पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति में बाधाओं के बावजूद भारत में 2026 के खरीफ बुवाई सीजन से पहले उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। यूरिया, डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और एनपीके जैसे प्रमुख पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। सरकारी सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
यूरिया, डीएपी और एनपीके का मजबूत भंडार
सूत्रों के अनुसार, इस समय यूरिया का भंडार लगभग 62 लाख टन है, जो पिछले साल इसी अवधि के मुकाबले करीब 10 लाख टन अधिक है। डीएपी का भंडार करीब 25 लाख टन आंका गया है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुना है। जबकि एनपीके का भंडार रिकॉर्ड 56 लाख टन तक पहुंच गया है। पिछले साल इसी समय यह 31 लाख टन था। आने वाले महीनों में घरेलू उत्पादन भी उर्वरकों की उपलब्धता को मजबूत करेगा।
तेज कर दी गई यूरिया आयात की प्रक्रिया
आम तौर पर यूरिया का उत्पादन अनुमानित लगभग 25 लाख टन प्रति माह रहता है। हालांकि, मार्च में उत्पादन लगभग 17 लाख टन रहने की संभावना है, क्योंकि कुछ संयंत्रों ने गैस के बेहतर उपयोग के लिए पहले ही रखरखाव का काम शुरू कर दिया है। सरकार ने आयात की प्रक्रिया भी तेज कर दी है।
यूरिया के लिए जारी किया था वैश्विक टेंडर
सूत्रों ने बताया कि इस साल की शुरुआत में यूरिया के लिए वैश्विक निविदा (टेंडर) पहले ही जारी कर दी गई थी और फरवरी के मध्य में लगभग 13.5 लाख टन यूरिया का ऑर्डर दिया गया। आयातित यूरिया का लगभग 90 फीसदी मार्च के अंत तक भारत पहुंचने की उम्मीद है।
ये भी पढ़ें:
शशि थरूर की सरकार से अपील- ईरान युद्ध खत्म कराने के लिए कूटनीतिक पहल करे भारत, बढ़ रहा एलपीजी संकट
ईपीएमसी के जरिये गैस खरीद को मंजूरी
सरकार ने सशक्त पूल प्रबंधन समिति (ईपीएमसी) के जरिये तुरंत गैस खरीद को भी मंजूरी दी है। माना जा रहा है कि गेल जल्द ही खरीद का पहला चरण शुरू करेगा। रूस से उर्वरकों की आपूर्ति बिना बाधा के जारी है, जबकि रूस और मोरक्को से आने वाली आपूर्ति फिलहाल पारंपरिक समुद्री मार्गों में बाधा के कारण केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजी जा रही है। सऊदी अरब के साथ भारत का डीएपी के लिए पांच साल का आपूर्ति समझौता भी जारी है, जिससे इस अहम उर्वरक का आयात लगातार होता रहेगा।
खरीफ से पहले स्थिति
अधिकारियों ने कहा कि आम तौर पर मई के मध्य से शुरू होने वाले खरीफ सीजन से पहले उर्वरकों का भंडार पर्याप्त रहने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति का पूरा अनुमान मानसून की प्रगति और समय पर भी निर्भर करेगा। अधिकारियों ने बताया कि 652 जिलों में उर्वरकों की बिक्री पर एक डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम के जरिये नजर रखी जा रही है, ताकि असामान्य बिक्री के तर्ज का पता लगाया जा सके और जमाखोरी या गड़बड़ी को रोका जा सके।